थार रेगिस्तान में जीवन की उम्मीद बनीं 'बेरियां', जल संकट दूर करने के लिए शुरू हुआ खास अभियान राजस्थान एक घंटा पहले 2
बाड़मेर जिले में थार की पारंपरिक जल संरचनाओं बेरियों को बचाने की मुहिम शुरू की गई है, ताकि भीषण गर्मी में लोगों और वन्यजीवों को पानी मिल सके।

मरुधरा में पानी की नई किरण

भीषण गर्मी के इस दौर में जब पूरा थार मरुस्थल जल संकट से जूझ रहा है, तब बाड़मेर के लोगों ने अपनी पुरानी विरासत को बचाने की ठान ली है। रेगिस्तान में पानी के सबसे बड़े और भरोसेमंद स्रोत रही बेरियों को फिर से जीवित करने का काम शुरू किया गया है। बेरियां न केवल इंसानों के लिए, बल्कि रेगिस्तानी वन्यजीवों के लिए भी जीवन का आधार रही हैं।

क्या है बेरियों का महत्व

बेरियां सदियों पुरानी एक ऐसी तकनीक है जिससे रेत के नीचे जमा नमी को इकट्ठा करके मीठा पानी निकाला जाता है। अब पर्यावरण के प्रति जागरूक लोगों ने इन पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया है। इस अभियान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • लुप्त होती बेरियों की सफाई और मरम्मत करना।
  • बेरियों के आसपास जलकुंड का निर्माण करना।
  • पर्यावरण संतुलन के लिए बड़े स्तर पर वृक्षारोपण करना।

आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर

इस संरक्षण मुहिम का मकसद केवल पानी की उपलब्धता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि राजस्थान की उस संस्कृति को बचाना भी है जो पानी की बूंद बूंद को सहेजने के लिए जानी जाती है। यह प्रयास न केवल वर्तमान की प्यास बुझाने के लिए है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण की इस अनमोल परंपरा को सुरक्षित रखने का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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