Gopal Sahni की यादें और 100 साल पुराना बरगद का पेड़, जो आज भी गांव वालों के लिए है संजीवनी बिहार 2 महीने पहले 73
पूर्वी चंपारण में स्थित एक सदी पुराना बरगद का पेड़ आज भी भीषण गर्मी में लोगों को राहत देता है। इस पेड़ को गोपाल Sahni ने लगाया था, जो अब हमारे बीच नहीं रहे।

इतिहास और पहचान

पूर्वी चंपारण जिले के हरसिद्धि प्रखंड के पन्नापुर गांव में एक विशाल बरगद का वृक्ष स्थित है, जो 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है। यह पेड़ अपनी अद्भुत बनावट के लिए जाना जाता है। इसकी जटाएं वापस तने में बदल जाती हैं, जिससे नई शाखाओं का विकास होता है। ग्रामीणों के अनुसार, इस पेड़ की जड़ें काफी दूर तक फैली हुई हैं, जो कई बार गांव से आधा किलोमीटर दूर खेतों तक में देखी गई हैं।

पेड़ का महत्व और विरासत

इस बरगद के पेड़ को गांव के ही गोपाल Sahni ने तब लगाया था, जब वे बच्चे थे। हालांकि गोपाल Sahni का देहांत कई वर्ष पहले हो चुका है, लेकिन आज भी गांव में उनकी यह निशानी जीवित है। बुजुर्ग बताते हैं कि गोपाल Sahni को इस पेड़ से गहरा लगाव था और वे इसकी देखभाल के लिए अक्सर पेड़ पर पानी के साथ-साथ दूध भी चढ़ाया करते थे।

ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी

आज के दौर में जब पेड़ों की कटाई एक बड़ी समस्या बनी हुई है, यह बरगद का पेड़ गांव वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:

  • भीषण गर्मी में राहत: चिलचिलाती धूप से बचने के लिए ग्रामीण इस पेड़ की छाया में बैठकर विश्राम करते हैं।
  • आराम का स्थान: राहगीर और ग्रामीण अक्सर थकान मिटाने के लिए इस पेड़ के नीचे बैठते हैं और आराम करते हैं।
  • पशुओं के लिए भोजन: स्थानीय बकरी पालक इस पेड़ की पत्तियों का उपयोग बकरियों के चारे के रूप में करते हैं।

पुराने समय में जब तकनीक के साधन सीमित थे, तब यही पेड़ लोगों को भीषण तापमान से राहत दिलाने का मुख्य जरिया हुआ करते थे। आज भी पन्नापुर गांव का यह बरगद अपनी जड़ों और हरियाली के साथ उस दौर की कहानी बयां कर रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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