देवभूमि पर प्लास्टिक का संकट: पर्यटकों की लापरवाही से पहाड़ों और ग्लेशियरों पर मंडरा रहा खतरा उत्तराखंड एक घंटा पहले 2
उत्तराखंड में पर्यटकों की बढ़ती संख्या से आर्थिक लाभ तो हो रहा है, लेकिन पहाड़ों पर फैलाया जा रहा कचरा पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

पहाड़ों की सुंदरता के बीच बढ़ता कचरे का अंबार

उत्तराखंड के सुरम्य पहाड़ों, रोमांचक ट्रैकिंग मार्गों और कल-कल बहती नदियों को देखने के लिए हर साल लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। पर्यटकों की इस भीड़ से राज्य में पर्यटन उद्योग और रोजगार के अवसर तो बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके साथ एक ऐसा खतरा भी पनप रहा है जो आने वाले समय में बड़ी तबाही का कारण बन सकता है। पहाड़ों की गोद में पिकनिक मनाने के नाम पर लोग बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा छोड़ रहे हैं।

ग्लेशियर और जल स्रोतों पर सीधा असर

पर्यटकों द्वारा फेंका गया यह प्लास्टिक कचरा केवल जमीन को ही प्रदूषित नहीं कर रहा है, बल्कि हमारे जल स्रोतों के लिए भी जहर बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कचरा नदियों के जल को जहरीला बना रहा है। सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि पहाड़ों पर बढ़ रहा प्रदूषण सीधे तौर पर ग्लेशियरों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। कचरे के कारण पैदा हो रही गर्मी से ग्लेशियरों के पिघलने की गति तेज हो रही है, जो भविष्य में बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं को न्योता दे सकती है।

भविष्य के लिए चेतावनी

देवभूमि के नाम से मशहूर उत्तराखंड को अपनी प्राकृतिक विरासत को बचाने के लिए गंभीर कदम उठाने की जरूरत है। यदि समय रहते पर्यटकों की इस लापरवाही पर नियंत्रण नहीं पाया गया और कचरा प्रबंधन को लेकर ठोस पहल नहीं हुई, तो सुकून देने वाले ये पहाड़ धीरे-धीरे विनाश की ओर बढ़ जाएंगे। पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता ही एकमात्र समाधान है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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