दिल्ली चिड़ियाघर में हिरणों की भीड़, क्षमता से तीन गुना अधिक पहुंची संख्या दिल्ली एक घंटा पहले 3
दिल्ली के चिड़ियाघर में जानवरों की तादाद तय सीमा से कहीं ज्यादा हो गई है, जिससे प्रबंधन के सामने जगह की कमी और जानवरों की आपसी लड़ाई जैसी नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

बढ़ते जानवरों ने बढ़ाई प्रबंधन की मुसीबत

राष्ट्रीय राजधानी स्थित दिल्ली के चिड़ियाघर में इन दिनों शाकाहारी वन्यजीवों की आबादी में भारी उछाल देखा जा रहा है। यहां काले हिरण, चीतल और संगाई जैसे जानवरों की संख्या बाड़ों की निर्धारित क्षमता से कहीं ज्यादा हो गई है। हालत यह है कि कुछ प्रजातियों की आबादी तो तय सीमा से तीन गुना तक बढ़ गई है। चिड़ियाघर के अधिकारियों के अनुसार, लगातार स्थानांतरण के प्रयास किए जाने के बावजूद जानवरों की संख्या को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

किस प्रजाति की कितनी अधिक है संख्या

चिड़ियाघर प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बाड़ों में जानवरों की स्थिति इस प्रकार है:

  • काले हिरण: तय क्षमता 40 के मुकाबले संख्या 143 हो गई है।
  • चीतल: 30 की क्षमता के मुकाबले इनकी संख्या 85 दर्ज की गई है।
  • काले मृग: 20 से 25 की सीमा के मुकाबले इनकी तादाद 80 तक पहुंच गई है।
  • संगाई हिरण: 20 की क्षमता के मुकाबले इनकी संख्या 66 है।
  • बार्किंग हिरण: 20 की क्षमता के मुकाबले 56 जानवर मौजूद हैं।
  • सांभर और नीलगाय: दोनों की निर्धारित क्षमता 20 है, जबकि इनकी संख्या 36-36 है।
  • जंगली सूअर: 4 की क्षमता के मुकाबले 15 जानवर बाड़ों में हैं।

पक्षी और अन्य जीवों पर भी असर

सिर्फ स्तनधारी जानवर ही नहीं, बल्कि पक्षियों के बाड़ों पर भी दबाव काफी बढ़ गया है। पेंटेड स्टॉर्क की संख्या 25 की निर्धारित क्षमता के मुकाबले 90 तक पहुंच गई है, वहीं जंगल फाउल (जंगली मुर्गे) की आबादी भी 15 की सीमा से बढ़कर 44 हो गई है। चिड़ियाघर प्रबंधन ने पिछले दो-तीन वर्षों में करीब 110 जानवरों को गुजरात के वंतारा और 150 से अधिक जानवरों को राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स बाघ संरक्षित क्षेत्र में स्थानांतरित किया है, फिर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

हिंसक व्यवहार की बढ़ी आशंका

अधिकारियों का मानना है कि बाड़ों में जगह कम होने से जानवरों के स्वाभाविक व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। अधिक भीड़-भाड़ के कारण जानवरों में आपसी तनाव और लड़ाई की घटनाएं बढ़ गई हैं। बाड़ों में सीमित जगह होने से अक्सर ये जानवर आपस में भिड़ जाते हैं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें लगने का खतरा रहता है और उन्हें पशु-चिकित्सकों की देखरेख की आवश्यकता पड़ती है। प्रबंधन के लिए अब बाड़ों की सीमित सुविधाओं के बीच इन जानवरों का सही रखरखाव करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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