दरभंगा की ग्रीन रोड: तपती गर्मी में भी स्वर्ग जैसा एहसास, शहर से 5 डिग्री कम रहता है तापमान बिहार एक दिन पहले 8
बिहार के दरभंगा में एक ऐसी सड़क है, जो चिलचिलाती धूप में भी मुसाफिरों को ठंडक का अहसास कराती है। बरगद और नीम के घने पेड़ों से ढकी यह सड़क न सिर्फ राहत देती है, बल्कि मिथिलांचल की लाइफलाइन भी मानी जाती है।

गर्मी से राहत का जरिया बनी ग्रीन रोड

बिहार में भीषण गर्मी और लू के कारण तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे में सड़क पर निकलना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। लेकिन दरभंगा में एक ऐसी जगह है, जहां पहुंचते ही पारा गिर जाता है और गर्मी का अहसास खत्म हो जाता है। दरभंगा से बेनीपुर होते हुए कुशेश्वर स्थान जाने वाली सड़क, जिसे लोग ग्रीन रोड के नाम से जानते हैं, इन दिनों किसी जन्नत से कम नहीं है।

पेड़ों की घनी छांव और सुकून भरा सफर

इस सड़क के दोनों ओर बरगद, पीपल, महुआ और नीम के विशालकाय पेड़ों की कतारें हैं, जो किसी प्राकृतिक छतरी की तरह काम करती हैं। इस रास्ते से गुजरने वाले वाहन चालकों का कहना है कि शहर के बाकी हिस्सों की तुलना में यहां का तापमान लगभग 5 डिग्री कम महसूस होता है। धूप की तपिश के बजाय यहां पत्तों की सरसराहट और ठंडी हवा के झोंके यात्रियों का स्वागत करते हैं। कई मुसाफिर तो सफर के दौरान इन पेड़ों की छांव में कुछ देर सुस्ताने के लिए रुकते भी हैं।

मिथिलांचल की महत्वपूर्ण लाइफलाइन

यह मार्ग केवल अपनी हरियाली के लिए ही नहीं, बल्कि परिवहन के लिहाज से भी बेहद अहम है। दरभंगा से निकलकर यह सड़क बेनीपुर और बिरौल के रास्ते सीधे कुशेश्वर स्थान तक जाती है। यह मार्ग कई प्रमुख जिलों जैसे सहरसा, कटिहार, बेगूसराय और समस्तीपुर को आपस में जोड़ता है। रोज हजारों की संख्या में बसें, ट्रक, एम्बुलेंस और स्कूल वैन इस रास्ते का इस्तेमाल करती हैं।

पर्यावरण संरक्षण का बड़ा उदाहरण

इस सड़क की हरियाली प्रशासन और स्थानीय लोगों की सामूहिक मेहनत का नतीजा है। सड़क चौड़ीकरण के दौरान भी पेड़ों को बचाने की पूरी कोशिश की गई। आज ये पेड़ न केवल पर्यावरण को संतुलित रखने का काम कर रहे हैं, बल्कि वाहनों से होने वाली धूल और प्रदूषण को भी काफी हद तक थाम लेते हैं। पक्षियों का कलरव और पेड़ों की ठंडक इस सड़क को शहर की कंक्रीट वाली सड़कों से अलग एक पहचान देती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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