उपनाम: प्रेरणादायक कहानी
अंबाला: बेटे को रेल दुर्घटना में खोने के बाद जगदीश कुमार ने संभाली 200 बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी
अंबाला के जगदीश कुमार ने अपने 18 वर्षीय बेटे को रेल हादसे में खोने के बाद दुख को सेवा में बदल दिया है और अब वे श्री बालाजी सेवा समिति के जरिए 200 जरूरतमंद विद्यार्थियों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं।
सागर का नया 'मांझी': 16 साल के किशोर ने परिवार की प्यास बुझाने के लिए अकेले खोदा 25 फीट गहरा कुआं
मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक 16 वर्षीय छात्र अनीश फौजदार ने अपने परिवार को पानी की किल्लत से मुक्ति दिलाने के लिए अद्भुत जज्बा दिखाया है। बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले अनीश ने किसी की मदद लिए बिना अकेले ही 25 फीट गहरा कुआं खोदकर पानी निकाल दिया है।
संघर्षों से भरी है डॉ. अभय झा की कहानी: पिता ने बैंक से कर्ज लेकर पूरा किया डॉक्टर बनाने का सपना
पूर्णिया के डेंटिस्ट डॉ. अभय कुमार झा की सफलता की कहानी एक शिक्षक पिता के अटूट विश्वास और आर्थिक तंगी के बीच संघर्ष की मिसाल है।
UPSC सफलता की कहानी: पिता बेचते हैं चाय और नाश्ता, बेटे ने असिस्टेंट कमांडेंट बनकर बदला परिवार का भाग्य
मुजफ्फरपुर के घनश्याम जायसवाल ने विपरीत आर्थिक परिस्थितियों और कई असफलताओं के बावजूद यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर असिस्टेंट कमांडेंट का पद हासिल किया है।
अंबाला के विशाल वर्मा की अनूठी पहल: कोरोना काल के बाद से बदल गई जीवन की दिशा, टीबी मरीजों की कर रहे सेवा
अंबाला के रहने वाले विशाल वर्मा ने समाजसेवा को ही अपने जीवन का मकसद बना लिया है। एक सर्राफ होने के बावजूद वे अस्पताल के मरीजों को फल बांटने से लेकर टीबी पीड़ितों को गोद लेने जैसे नेक काम कर रहे हैं।
जहानाबाद के सीताराम यादव: 70 साल की उम्र में बिना कपड़ों के खेत में बहाते हैं पसीना, खुद के हैं 2 ट्रैक्टर
बिहार के जहानाबाद में 70 वर्षीय किसान सीताराम यादव अपनी कड़ी मेहनत और सादगी से मिसाल पेश कर रहे हैं। वे दिन के 16 से 18 घंटे खेतों में काम करते हैं और अपनी मेहनत के दम पर 25 बीघा जमीन पर खेती कर रहे हैं।
मिट्टी से सोना बनाने की कला: खंडवा के इस युवक ने कबाड़ से तैयार की शानदार कलाकृतियां
मध्य प्रदेश के खंडवा निवासी पप्पू तंतवर कबाड़ को बेशकीमती सामान में बदलकर मिसाल पेश कर रहे हैं। उन्होंने अपनी रचनात्मकता से यह साबित कर दिया है कि कचरा समझी जाने वाली चीजों का सही इस्तेमाल पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित हो सकता है।
बिहार: करैत सांप के जहर और कोमा को दी मात, एक साल तक बिस्तर पर रहने के बाद ऐसे लौटे कमलकांत
बिहार के शिवहर के रहने वाले कमलकांत मिश्रा ने सांप के डसने के बाद मौत को मात दी है। डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने और एक साल तक कोमा में रहने के बावजूद उनकी पत्नी के अटूट विश्वास और लंबे इलाज ने उन्हें जीवनदान दिया है।
जमशेदपुर के कपल की प्रेम कहानी से जन्मा यह स्टार्टअप, अब विदेशों में भी मशहूर हैं उनकी खुशबूदार मोमबत्तियां
जमशेदपुर के रहने वाले स्नेहप्रिया और निखिल ने एक अनोखी समस्या के समाधान के रूप में 'Phases Handcrafted' नाम का स्टार्टअप शुरू किया, जो आज सुगंधित कैंडल्स के जरिए देश और विदेश में अपनी पहचान बना चुका है।
73 साल की उम्र में टूटी टांग के साथ 150 किलोमीटर का संघर्ष, इलाज के लिए ट्राइसाइकिल चलाकर पहुंचे बुजुर्ग
ओडिशा के नयागढ़ जिले के 73 वर्षीय बुजुर्ग सुकदेव नाहक ने अपनी टूटी टांग के बावजूद 150 किलोमीटर की कठिन यात्रा ट्राइसाइकिल से पूरी कर सभी को हैरान कर दिया है। इलाज की उम्मीद में उन्होंने तीन दिनों तक यह लंबा सफर तय किया और अंततः ब्रह्मपुर के अस्पताल पहुंचे...
भोले बाबा से लगाई गुहार: स्कूल फीस भरने के पैसे नहीं थे, तो 3 बेटियों ने कंधे पर उठाई कांवड़
फरीदाबाद की 15 साल की छात्रा साधना ने अपने दिव्यांग माता-पिता और आर्थिक तंगी के चलते कांवड़ यात्रा शुरू की है। पढ़ाई जारी रखने के लिए उसने महादेव से चमत्कार की उम्मीद की है।
फ्रेंडशिप डे: बिना बोले ही बयां हो जाता है दिल का हाल, बिलासपुर के इन तीन दोस्तों की कहानी ने जीता सबका मन
बिलासपुर के तीन मूकबधिर दोस्तों की अटूट मित्रता ने फ्रेंडशिप डे पर मिसाल कायम की है, जो शब्दों के बिना ही एक-दूसरे के जज्बातों को बखूबी समझते हैं।
गया के शिक्षक धर्मेंद्र कुमार की अनोखी पहल: बिना फीस पढ़ाकर 84 युवाओं को दिलाई सरकारी नौकरी, गुरुदक्षिणा में रखी बस एक अनोखी शर्त
बिहार के गया जिले के एक सरकारी शिक्षक धर्मेंद्र कुमार पिछले 25 वर्षों से गरीब बच्चों को निशुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवा रहे हैं। उनकी अनोखी शर्त के कारण अब तक दर्जनों गरीब युवाओं की जिंदगी संवर चुकी है।
बिहार का यह सरकारी स्कूल बना मिसाल, महंगे प्राइवेट स्कूलों को पछाड़कर देशभर में लहराया परचम
पूर्णिया का उफरैल मध्य विद्यालय स्वच्छता, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान बन चुका है। हाल ही में हुए एक सर्वे में इस स्कूल ने देश भर में 21वां और बिहार में दूसरा स्थान हासिल किया है।
झारखंड की मदर टेरेसा: सिस्टर निर्मला जोशी का जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित
रांची की सिस्टर निर्मला जोशी को राज्य की मदर टेरेसा के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन निस्वार्थ भाव से समाज सेवा और जरूरतमंदों के उत्थान में लगा दिया। मिशनरीज ऑफ चैरिटीज की प्रमुख रहीं निर्मला जोशी के जीवन सफर और उनके योगदानों पर एक वि...