उपनाम: प्रेरणादायक कहानी
पटना के पंडित ओम तिवारी का अनूठा संकल्प: दक्षिणा से करेंगे गरीब बेटियों का कन्यादान
पटना के पंचरूपी हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित ओम तिवारी ने एक अनोखा संकल्प लिया है. उन्होंने अपनी दक्षिणा और निजी आय से हर साल एक जरूरतमंद बेटी की शादी कराने का फैसला किया है, जिसकी सभी तरफ सराहना हो रही है.
आमिर खान से रिश्तेदारी फिर भी संघर्ष कम नहीं! रियलिटी शो में दिखेंगी सहारनपुर की शायमा शेख
बिना किसी पारिवारिक सहारे और गॉडफादर के अपनी पहचान बनाने वालीं सहारनपुर की शायमा शेख अब दूरदर्शन के नए रियलिटी शो 'जिंदगी अनफिल्टर्ड' में नजर आएंगी।
अंबाला का अनोखा सफर: डांस के जुनून में जब अभ्यास से कमजोर पड़ गई घर की छत, मिली 'अंबाला के रितिक रोशन' की पहचान
कभी 300 रुपये महीने पर काम करने वाले अंबाला के निशांत कश्यप आज सफल डांस प्रशिक्षक हैं और सैकड़ों बच्चों को मंच तक पहुंचा रहे हैं। उनके डांस स्टाइल की वजह से लोग उन्हें 'अंबाला का रितिक रोशन' कहने लगे हैं।
रोज सुबह 5 बजे जागकर 10 घंटे पढ़ाई, 19 साल के ओवैस ने IIT मुंबई में जगह बनाकर रच दिया इतिहास
उमरिया के 19 वर्षीय ओवैस मंसूरी ने चार साल की लगातार मेहनत और रोजाना 8 से 10 घंटे की सेल्फ स्टडी के दम पर जेईई मेंस में 1856 रैंक हासिल कर IIT मुंबई में दाखिला पाया है। पिछले साल चयन के बावजूद उन्होंने अपने सपने के लिए एक साल का ड्रॉप लिया था।
जालौर के 'रक्तवीर' नीतेश भटनागर: एक फोन कॉल पर पहुंचाते हैं खून, निस्वार्थ भाव से बचा रहे सैकड़ों जिंदगियां
जालौर के नीतेश भटनागर अब तक 40 से ज्यादा बार रक्तदान कर चुके हैं और सिर्फ एक कॉल पर जरूरतमंदों को मुफ्त ब्लड उपलब्ध कराते हैं। उनकी निस्वार्थ सेवा से आज सैकड़ों जिंदगियां बच रही हैं।
बचपन में मां को खोया, पिता ने भी मुंह मोड़ा, फिर भी रीवा की कल्पना बनीं रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट
रीवा की 23 वर्षीय कल्पना प्रजापति ने मां-पिता दोनों को खोने और कठिन हालात के बावजूद हार नहीं मानी और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल में असिस्टेंट लोको पायलट के रूप में चयनित हो गईं।
न पैसे थे न किसी का सहारा, फिर भी गांव की इस बेटी ने रचा इतिहास, रेलवे में पाया बड़ा ओहदा
रीवा के बहुरीबांध गांव की 23 वर्षीय कल्पना प्रजापति ने तमाम मुश्किलों को पार कर भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट का पद हासिल किया है। माता-पिता दोनों को खोने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने सपने को सच कर दिखाया।
हादसे ने बदली राह: मंदिर में दो बच्चों से शुरू हुआ सफर, आज हजारों का सहारा बनीं सुशीला बोहरा
पति की दृष्टि और फिर उनके निधन के बाद टूटने के बजाय समाजसेवा का रास्ता चुनने वाली सुशीला बोहरा ने 1977 में दो नेत्रहीन बच्चों के साथ संस्थान की नींव रखी थी, जो आज सैकड़ों बच्चों का सहारा है।
इस गांव को कहते हैं 'फौजियों की फैक्ट्री', खुद वर्दी न पहन सके युवक ने तैयार कर दिए दर्जनों जवान
बुरहानपुर के शाहपुर का एक युवक हाइट की वजह से खुद फौज में भर्ती नहीं हो सका, लेकिन हार न मानते हुए उसने एकेडमी खोलकर 7 साल में 37 बच्चों को सेना और पुलिस में भर्ती करा दिया।
Success Story : सरकारी नौकरी को कहा अलविदा, 10 साल पहले 10 लाख से शुरू किया सफर, आज खड़ी कर दी 150 करोड़ की कंपनी
एक युवा उद्यमी ने सुरक्षित सरकारी नौकरी छोड़कर 10 साल पहले 10 लाख रुपये से अपना कारोबार शुरू किया और आज उनकी कंपनी 150 करोड़ रुपये की हो चुकी है।
सरहद के इस माड़साहब ने बदली धरती की रंगत, पहली तनख्वाह से बोई थी हरियाली की नींव
बाड़मेर के शिक्षक भैराराम भाखर बीते 26 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण को मिशन बनाकर जुटे हैं और अब तक करीब 4.65 लाख पौधे लगा चुके हैं। पहली सरकारी तनख्वाह से शुरू हुआ उनका यह सफर हर परिवार को प्रकृति से जोड़ने के संकल्प तक पहुंच गया है।
सिलाई से सींचे सपने, गोल्ड लोन से जुटाई फीस: संघर्ष के बीच जिगर बना गांव का पहला IITian
ओडिशा के गंजम जिले के एक छोटे से गांव के जिगर नायक ने जेईई-एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 5474 हासिल कर आईआईटी का सपना पूरा किया है। पिता के निधन के बाद मां ने सिलाई का काम कर उसकी पढ़ाई का खर्च उठाया।
न पेट्रोल का खर्च, न थकान की शिकायत: वन अधिकारी केसी मीना ने साइकिल को बनाया मिशन, हर जुबां पर 'साइकिलमैन'
57 वर्षीय वन विभाग के अधिकारी केसी मीना ड्यूटी के दौरान भी साइकिल से एक जिले से दूसरे जिले तक का सफर तय करते हैं। फिटनेस के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले इस अधिकारी को आज हर कोई 'साइकिलमैन' के नाम से जानता है।
मौज-मस्ती की उम्र में मिसाल बनी अंशिका, गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ातीं और पॉकेट मनी से खरीदतीं कॉपी-पेंसिल
जमशेदपुर की ग्रेजुएशन छात्रा अंशिका हर दिन 20 से 25 गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देती हैं और अपनी पॉकेट मनी बचाकर उनके लिए पढ़ाई का सामान भी खरीदती हैं।
मां की मजदूरी और बेटी का जज्बा: मिट्टी के घर से अंतरराष्ट्रीय मैदान तक दिव्यानी लिंडा का सफर
रांची के माझी परखर स्थित चरदी गांव की दिव्यानी लिंडा भारतीय अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम की सदस्य हैं। मिट्टी के घर में बीते कठिन बचपन से निकलकर उन्होंने अपने खेल के बल पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है।