हरियाणा
5 घंटे पहले
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विचारों
गहरे दुख को बनाया सेवा का माध्यम
अंबाला निवासी जगदीश कुमार और उनकी पत्नी के लिए जीवन में एक ऐसा समय आया जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया। उन्होंने महज 18 साल की उम्र में अपने इकलौते बेटे को एक दुखद रेल दुर्घटना में खो दिया। अपने बेटे की सफलता के सपनों के बिखरने के बावजूद इस दंपत्ति ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी व्यक्तिगत पीड़ा को समाजसेवा की प्रेरणा बना लिया।
श्री बालाजी सेवा समिति का सराहनीय कार्य
जगदीश कुमार ने अपने जीवन का उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों की सेवा को बना लिया है। वे वर्तमान में श्री बालाजी सेवा समिति के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। यह संस्था शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ गरीब परिवारों को राहत पहुँचाने और लावारिस शवों का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करने जैसे पुनीत कार्यों में जुटी है।
200 छात्रों का संवार रहे भविष्य
जगदीश कुमार ने स्थानीय मीडिया के साथ बातचीत में बताया कि उनकी समिति ने शिक्षा के विस्तार हेतु दो स्कूलों को गोद ले रखा है। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले लगभग 200 जरूरतमंद बच्चों की पूरी शिक्षा का खर्च श्री बालाजी सेवा समिति द्वारा वहन किया जा रहा है। अपने बेटे को खोने के गम को भूलकर वे आज कई घरों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को संवारने का नेक काम कर रहे हैं।
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