उपनाम: प्रेरणादायक कहानी
बचपन की जानलेवा बीमारी को मात देकर कॉमेडी क्वीन बनीं उपासना सिंह, फर्श से अर्श तक का सफर
मशहूर अभिनेत्री उपासना सिंह ने न केवल अपनी कॉमेडी से लाखों लोगों का दिल जीता है, बल्कि उन्होंने बचपन में एक गंभीर दिल की बीमारी से लड़कर मौत को भी मात दी है। पंजाब के होशियारपुर से निकलकर मनोरंजन जगत में अपनी जगह बनाने तक का उनका संघर्ष किसी प्रेरणादायक क...
अंजू बेन नू रसोड़ो: सास-बहू की जोड़ी ने घर के खाने से खड़ा किया कामयाबी का सफर
एक छोटे से प्रयास से शुरू हुआ 'अंजू बेन नू रसोड़ो' आज अपने पारंपरिक स्वाद और शुद्धता के कारण लोगों की पहली पसंद बन चुका है, जो महिला उद्यमिता की एक अनूठी मिसाल है।
बुरहानपुर के सोहनलाल की प्रेरणादायक कहानी: 20 हजार के कर्ज से शुरू किया पराठे का ठेला, आज लाखों में है कमाई
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के रहने वाले सोहनलाल ने महज सातवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद पराठे का ठेला लगाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। आज वे न केवल खुद लाखों कमा रहे हैं, बल्कि दूसरों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं।
बाड़मेर के किसान पुत्र मोती सिंह का कमाल: 20 साल की उम्र में हासिल की 4 सरकारी नौकरियां
राजस्थान के बाड़मेर जिले के रहने वाले 20 वर्षीय मोती सिंह पोटलिया ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर एक साथ चार सरकारी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
यूपीएससी की परीक्षा पास करना सिर्फ शुरुआत है, नेहा शोरी की प्रेरणादायक और भावुक कहानी
लाखों युवाओं के लिए यूपीएससी एक सपना है, लेकिन नेहा शोरी का जीवन हमें सिखाता है कि एक अधिकारी के लिए कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी पद से कहीं ज्यादा मायने रखती है।
झुंझुनूं की बेटी बबीता मीणा की कामयाबी की कहानी, गली क्रिकेट से टीम की कप्तानी तक का सफर
झुंझुनूं की बबीता मीणा ने विपरीत परिस्थितियों को मात देते हुए जिला महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी तक का मुकाम हासिल किया है।
स्टेज 4 कैंसर को मात देने की जिद, 11000 फीट की ऊंचाई पर नफीसा अली ने की ट्रेकिंग
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहीं मशहूर अभिनेत्री नफीसा अली सोढ़ी ने अपनी जीवटता का परिचय देते हुए 11000 फीट की ऊंचाई पर ट्रेकिंग की है। कीमोथेरेपी और सर्जरी के दौर से गुजर रहीं नफीसा ने अपने परिवार के साथ इस खास पल को साझा किया है।
35 साल से चल रहा है इस किसान का HMT ट्रैक्टर, 1991 में सिर्फ 2 लाख रुपये में हुई थी खरीदारी
जहानाबाद के एक किसान ने तीन दशक से भी अधिक समय पहले खरीदा था अपना ट्रैक्टर, आज भी यह मशीन पूरी तरह काम कर रही है।
दो बार मिली असफलता, फिर भी नहीं मानी हार, अब लेह-लद्दाख के DGP के रूप में संभाल रहे कमान
बुरहानपुर के रहने वाले आनंद जैन ने यूपीएससी में सफलता हासिल कर आईपीएस बनने का सपना सच किया। आज वे लेह-लद्दाख के डीजीपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
हार नहीं मानी, 8 बार की नाकामी के बाद बदली किस्मत: किसान की बेटी राधा चंद्रवंशी बनीं FSO
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की खाद्य सुरक्षा अधिकारी परीक्षा में कचनारिया गांव की राधा चंद्रवंशी ने शानदार सफलता हासिल की है। कई असफलताओं का सामना करने के बावजूद उन्होंने पहले ही प्रयास में FSO बनकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
बीपीएससी में सफलता का परचम: बड़े भाई के त्याग से एसडीएम बने नवादा के अनंत लाल
नवादा के झौर गांव के रहने वाले अनंत लाल ने बीपीएससी परीक्षा में 159वीं रैंक लाकर एसडीएम का पद हासिल किया है। अपनी इस बड़ी कामयाबी का श्रेय उन्होंने अपने बड़े भाई के उस संघर्ष को दिया है, जिन्होंने उनके सपनों के लिए अपनी पढ़ाई तक कुर्बान कर दी।
बुरहानपुर के भाई-बहन की मिसाल: पढ़ाई के साथ शुरू किया ऑर्गेनिक जूस का स्टार्टअप, सोशल मीडिया से मिली प्रेरणा
बुरहानपुर में दो भाई-बहन अपनी कॉलेज की पढ़ाई के साथ ऑर्गेनिक जूस का स्टॉल चलाकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। मात्र 5000 रुपये की शुरुआती पूंजी से शुरू हुआ यह काम अब लोगों की पहली पसंद बन गया है।
संघर्षों से भरी दास्तां, भाई और पिता को खोने के बाद तनु प्रिया ने ऐसे हासिल की BPSC में सफलता
समस्तीपुर की तनु प्रिया ने विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए BPSC 70वीं परीक्षा में 178वीं रैंक हासिल कर नगर कार्यपालक पदाधिकारी का पद प्राप्त किया है।
फादर्स डे: अखबार बेचकर बच्चों को बनाया अफसर, अमेठी के DM और SP के पिता के संघर्ष की दास्तान
फादर्स डे के अवसर पर अमेठी के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने अपने पिता के संघर्ष और त्याग की भावुक कहानियां साझा की हैं।
लकवे से हारी नहीं हिम्मत, 5000 रुपये और एक छतरी से खड़ा किया फूड बिजनेस
शिवपुरी की वीना चतुर्वेदी ने लकवे जैसी गंभीर बीमारी को मात देकर महज 5,000 रुपये के निवेश से अपना फूड एंपायर खड़ा कर दिया है। आज वह और उनका बेटा अपने स्टॉल से रोजाना हजारों की कमाई कर आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।