फ्रेंडशिप डे: बिना बोले ही बयां हो जाता है दिल का हाल, बिलासपुर के इन तीन दोस्तों की कहानी ने जीता सबका मन छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 2
बिलासपुर के तीन मूकबधिर दोस्तों की अटूट मित्रता ने फ्रेंडशिप डे पर मिसाल कायम की है, जो शब्दों के बिना ही एक-दूसरे के जज्बातों को बखूबी समझते हैं।

फ्रेंडशिप डे पर सामने आई एक अनोखी मिसाल

दोस्ती का रिश्ता किसी भाषा या शब्दों का मोहताज नहीं होता है, यह बात छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सामने आई तीन दोस्तों की कहानी बखूबी साबित करती है। फ्रेंडशिप डे के खास मौके पर कान्हा पटेल, रामकुमार रजक और अशोक यादव की यह मित्रता चर्चा का विषय बन गई है। ये तीनों ही दोस्त मूकबधिर हैं, यानी न तो वे बोल सकते हैं और न ही सुन सकते हैं। हालांकि, उनकी यह शारीरिक सीमा उनकी दोस्ती के आड़े कभी नहीं आई। वे इशारों की अपनी एक अलग दुनिया में जीते हैं और बिना कुछ कहे एक-दूसरे के मन की बात पढ़ लेते हैं। आज उनकी यह अटूट बॉन्डिंग पूरे शहर के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है।

अलग-अलग ठिकाने, लेकिन दिल एक

इन तीन दोस्तों की जिंदगी और उनका जुड़ाव काफी दिलचस्प है। कान्हा पटेल बिलासपुर के मुक्तिधाम के पास रहते हैं, रामकुमार रजक अशोक नगर के निवासी हैं, जबकि अशोक यादव चांटीडीह में अपना जीवन बिताते हैं। तीनों के घर अलग-अलग इलाकों में हैं और उनकी अपनी निजी व्यस्तताएं भी हैं, लेकिन उनकी मित्रता में दूरी कभी बाधा नहीं बनी। वे अलग-अलग जगहों पर रहते हुए भी एक अटूट डोर से बंधे हुए हैं। उनकी इसी सादगी और निस्वार्थ प्रेम ने आसपास के लोगों के दिलों में उनके लिए एक खास जगह बना दी है।

कंपनी गार्डन की ‘खामोश’ महफिल

इन तीनों दोस्तों की दिनचर्या का एक बेहद भावुक और खास पहलू इनकी शाम की मुलाकात है। चाहे कितनी भी व्यस्तता हो, ये तीनों रोजाना बिलासपुर के कंपनी गार्डन में इकट्ठा होते हैं। वहां बैठकर वे घंटों बातें करते हैं। उनकी यह बातचीत किसी आवाज वाली नहीं होती, बल्कि पूरी तरह से इशारों में होती है। उनके हाथ के संकेतों में छिपी गहराई को कोई भी देख सकता है। गार्डन में आने वाले लोग जब इन्हें पूरी तन्मयता से इशारों में बातें करते हुए देखते हैं, तो वे भी ठहर जाते हैं। वे बिना एक भी शब्द बोले अपनी दिन भर की थकान, खुशियां और एक-दूसरे की जरूरतों को बखूबी समझ लेते हैं।

मुसीबत में साये की तरह साथ

इन दोस्तों का रिश्ता केवल हंसी-मजाक या गपशप तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोग बताते हैं कि इन तीनों का जुड़ाव एक परिवार जैसा है। जब भी इनमें से किसी भी एक दोस्त पर कोई मुसीबत आती है, तो बाकी दो दोस्त बिना देरी किए उसकी सहायता के लिए पहुंच जाते हैं। चाहे दुकान के काम में हाथ बंटाना हो, तेज बारिश में एक-दूसरे का सहारा बनना हो या फिर जीवन की अन्य चुनौतियां, ये तीनों एक-दूसरे के साथ साये की तरह खड़े रहते हैं। इनका आपसी सामंजस्य देखकर लोग अब इन्हें महज दोस्त नहीं, बल्कि एक परिवार का हिस्सा मानने लगे हैं।

आंखों से झलकती है खुशी

जियाउल्लाह खान, जो पिछले 7-8 महीनों से लगातार कंपनी गार्डन आ रहे हैं, बताते हैं कि इन तीनों को देखना हर दिन एक नया अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भले ही ये लोग सुन और बोल नहीं सकते, लेकिन इनके चेहरों पर हमेशा एक प्यारी और सुकून भरी मुस्कान रहती है। उनकी बातचीत में जो आत्मीयता और अपनापन दिखता है, वह देखने वालों को भावुक कर देता है। वे जिस तरह एक-दूसरे का ख्याल रखते हैं, वह इंसानियत की एक मिसाल है।

जीवन की असली ताकत का सबक

स्थानीय निवासी पिंटू दुबे इन तीनों दोस्तों के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं। वे कहते हैं कि अगर एक सामान्य इंसान अपनी किसी एक इंद्रिय यानी Sense का उपयोग कुछ देर के लिए भी न कर पाए, तो उसे बड़ी कमी महसूस होने लगती है। लेकिन कान्हा, रामकुमार और अशोक ने अपनी शारीरिक अक्षमता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वे हर हाल में खुश रहना जानते हैं। पिंटू के अनुसार, इनकी मित्रता हमें सिखाती है कि जीवन में असली ताकत भौतिक सुविधाओं में नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और साथ निभाने के जज्बे में होती है।

एहसास का नाम है दोस्ती

आज फ्रेंडशिप डे के मौके पर जब पूरा शहर इन तीनों की चर्चा कर रहा है, तो यही संदेश निकलकर आता है कि सच्चे रिश्ते आवाज से नहीं, बल्कि एहसास से चलते हैं। इन तीनों दोस्तों ने यह साबित कर दिया है कि खामोशी में भी संवाद हो सकता है, बशर्ते दिल में प्रेम हो। उनकी मुस्कुराहट और समर्पण हर किसी के दिल में सम्मान पैदा करता है। ये केवल तीन दोस्त नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए एक सबक हैं जो शब्दों के शोर में रिश्तों की गहराई को भूल जाते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप