बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
शिवहर में मौत पर जीवन की अद्भुत जीत
बिहार के शिवहर जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह घटना मानवीय इच्छाशक्ति और अपनों के प्रति विश्वास की एक जीवंत मिसाल है। लगभग चार साल पहले, वर्ष 2021 में कमलकांत मिश्रा को एक बेहद जहरीले करैत सांप ने डस लिया था। सांप के काटने के कुछ ही घंटों के भीतर उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि वे बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। स्थानीय स्तर पर दी गई प्राथमिक चिकित्सा के बाद जब उनकी सांसें थम गईं, तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लेकिन परिवार वालों ने, विशेषकर उनकी पत्नी सपना मिश्रा ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा।
अस्पतालों की दौड़ और डॉक्टरों का जवाब
कमलकांत को जब सबसे पहले सदर अस्पताल ले जाया गया, तो वहां के डॉक्टरों ने उन्हें देखने तक से इनकार कर दिया और उन्हें मृत बता दिया। इसके बाद भी हार न मानते हुए परिजन उन्हें मुजफ्फरपुर के नोबेल अस्पताल ले गए। वहां करीब 4 घंटे तक इलाज चला और लगभग 1.5 लाख रुपये खर्च भी हुए, लेकिन अंततः वहां के डॉक्टरों ने भी उन्हें मृत ही करार दिया। समाज के लोगों और डॉक्टरों द्वारा बार-बार जवाब दिए जाने के बाद भी सपना मिश्रा का हौसला नहीं टूटा। उन्होंने हार मानने के बजाय अपने पति को मुजफ्फरपुर के ही प्रभात तारा अस्पताल में भर्ती कराने का निर्णय लिया।
प्रार्थना और इलाज से बंधी उम्मीद
प्रभात तारा अस्पताल में सपना मिश्रा ने डॉक्टरों, सिस्टर्स और वहां के फादर से अपने पति को बचाने की गुहार लगाई। उनकी भावुक करुणा और अदम्य विश्वास को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने मरीज को भर्ती करने के लिए हामी भर दी। डॉक्टरों ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अब मेहनत हमारी रहेगी, लेकिन बचेंगे या नहीं, यह इनका नसीब है। तीन दिनों के कड़े संघर्ष के बाद कमलकांत की पलकों में मामूली हलचल हुई। वे खतरे से बाहर तो आ गए, लेकिन सांप के जहर के घातक असर के कारण उन्हें 1 साल तक कोमा में रहना पड़ा।
कोमा के दौरान झेले 7 बड़े ऑपरेशन
कोमा के उस एक साल के कठिन दौर में कमलकांत पूरी तरह से बिस्तर तक ही सीमित रहे। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में लेटे रहने के कारण उनके शरीर पर गहरे घाव हो गए, जिससे पीठ और हिप की त्वचा बुरी तरह खराब हो गई थी। जहर का दुष्प्रभाव हटाने और घावों को भरने की लंबी प्रक्रिया में उन्हें 7 बड़े ऑपरेशन करवाने पड़े। इस दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई थी। वे एक दिन अस्पताल जाकर ड्रेसिंग करवाते तो अगले दिन खुद ही घर पर घाव साफ करने की कोशिश करते थे। डॉक्टरों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि उनके शरीर में जहर भरा होने के कारण कोमा से निकलते समय उनकी आंत या सिर फट सकता है। दुर्भाग्यवश, कमलकांत की आंत तो सुरक्षित रही लेकिन उनका सिर फट गया, जिसका निशान आज भी उनके सिर पर मौजूद है। सपना मिश्रा इसे पूरी तरह से ईश्वरीय करिश्मा मानती हैं।
14 लाख का खर्च और बहाली की प्रक्रिया
इस पूरे दर्दनाक और लंबे इलाज के दौरान परिवार के करीब 13 से 14 लाख रुपये खर्च हो गए। आर्थिक तंगी के बावजूद सपना मिश्रा ने माता रानी और अपनी आस्था पर विश्वास कायम रखा। वे दिन-रात अपने पति की सेवा में जुटी रहीं। उनकी निस्वार्थ सेवा और डॉक्टरों की लगातार मेहनत का ही परिणाम था कि कमलकांत न केवल कोमा से बाहर आए, बल्कि धीरे-धीरे उनके शरीर के घाव भी भर गए।
आज सामान्य जीवन की ओर कमलकांत
आज कमलकांत मिश्रा पूरी तरह मौत के मुंह से वापस आ चुके हैं। हालांकि, इलाज के दौरान उनके दिमाग पर पड़े असर के कारण उनकी याददाश्त थोड़ी प्रभावित हुई थी, लेकिन वर्तमान में वे 75% तक पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। वे अब सामान्य रूप से खान-पान कर रहे हैं, टहलने में सक्षम हैं और अपने कृषि फार्म की देखरेख भी खुद कर रहे हैं। यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है कि जहरीले सांप के काटने पर भी अगर सही समय पर इलाज और धैर्य का साथ न छोड़ा जाए, तो मौत को भी मात देना संभव है।
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