झारखंड की मदर टेरेसा: सिस्टर निर्मला जोशी का जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित झारखंड एक घंटा पहले 2
रांची की सिस्टर निर्मला जोशी को राज्य की मदर टेरेसा के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन निस्वार्थ भाव से समाज सेवा और जरूरतमंदों के उत्थान में लगा दिया। मिशनरीज ऑफ चैरिटीज की प्रमुख रहीं निर्मला जोशी के जीवन सफर और उनके योगदानों पर एक विशेष रिपोर्ट।

रांची की माटी से निकली एक प्रेरणा

झारखंड की राजधानी रांची में जन्मी और पली-बढ़ी सिस्टर निर्मला जोशी को स्थानीय लोग प्यार और सम्मान से 'झारखंड की मदर टेरेसा' के नाम से संबोधित करते हैं। समाज सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान इतना व्यापक रहा कि उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से नवाजा गया। उन्होंने अपना पूरा जीवन दीन-दुखियों की सेवा और मानवता के कल्याण में अर्पित कर दिया।

शुरुआती जीवन और मिशन से जुड़ाव

सिस्टर निर्मला का जन्म 23 जुलाई 1934 को रांची में हुआ था। उनके माता-पिता मूल रूप से नेपाल के रहने वाले थे। निर्मला जोशी का झुकाव बचपन से ही आध्यात्मिक और सेवा भाव की ओर था। मात्र 17 वर्ष की आयु में उन्होंने धर्म परिवर्तन का मार्ग चुना और मिशनरीज ऑफ चैरिटीज से जुड़ गईं। उनका मन सांसारिक मोह-माया और गृहस्थी के बंधनों में कभी नहीं रमा। उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य समाज में व्याप्त दुखों को दूर करना और लोगों को सही मार्ग दिखाना रहा।

मदर टेरेसा के साथ कार्य और उत्तराधिकार

सिस्टर निर्मला का मदर टेरेसा के साथ गहरा जुड़ाव था। मदर टेरेसा को उन पर इतना अधिक विश्वास था कि वे अपने हर दौरे पर उन्हें साथ ले जाती थीं। निर्मला जोशी ने दुनिया के कई देशों की यात्राएं कीं और मिशनरीज ऑफ चैरिटीज के नए केंद्रों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मार्च 1997 में, मदर टेरेसा के बाद उन्होंने संस्था की कमान संभाली और उसकी प्रमुख बनीं। उन्होंने देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपने सेवा कार्यों का लोहा मनवाया।

नशा मुक्ति और सामाजिक सुधार

सिस्टर थ्योडोरा एक्का, जो रांची के संत कुलदीप स्कूल से जुड़ी हैं, बताती हैं कि सिस्टर निर्मला का जीवन निस्वार्थ सेवा का साक्षात उदाहरण था। उन्होंने केवल उपदेश नहीं दिए, बल्कि धरातल पर काम किया। वे गांव-गांव जाकर लोगों से मिलीं। नशाखोरी की चपेट में आकर अपना जीवन बर्बाद कर रहे लोगों को उन्होंने नशा मुक्त कराने और उन्हें एक नई राह दिखाने में अहम भूमिका निभाई। उनके मन में समाज के हर दुखी व्यक्ति के प्रति अपार संवेदना थी।

एक आदर्श के रूप में विरासत

सिस्टर निर्मला जोशी का निधन वर्ष 2015 में कोलकाता में हुआ था। उनके देहावसान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई बड़े नेताओं और समाजसेवियों ने गहरा शोक प्रकट किया था। आज भी रांची में उन्हें एक प्रेरणा पुंज के रूप में देखा जाता है। स्कूल और कॉलेजों में बच्चे उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

नई पीढ़ी के लिए सीख

वर्तमान में स्कूलों में सिस्टर निर्मला की जीवनी पढ़ाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को यह सिखाना है कि किस प्रकार निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा की जाती है। केवल किताबी शिक्षा ही नहीं, बल्कि उस शिक्षा का लाभ समाज को कैसे मिले, यह सिस्टर निर्मला के जीवन से सीखा जा सकता है। वे बताती हैं कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य जनकल्याण है। आज भी रांची के लोग उनकी सादगी, समर्पण और करुणा को याद करते हैं, जो उन्हें एक विशिष्ट व्यक्तित्व प्रदान करती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप