उपनाम: जैविक खेती
सिरोही में जैविक अंजीर की खेती बनी किसानों की आमदनी का जरिया, कम पानी में मिल रहा भरपूर उत्पादन
अरावली की तलहटी में बसे सिरोही के आमथला गांव के तपोवन में करीब दो बीघा जमीन पर जैविक तरीके से अंजीर उगाई जा रही है। कम पानी, कम लागत और लगातार बनी रहने वाली मांग के चलते यह फसल किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।
गोबर की खाद से जैविक सब्जियों की खेती, किचन गार्डन से हर महीने अच्छी आमदनी—जानिए विमला की मिसाल
गोंडा की गृहिणी विमला मौर्य ने घर की खाली जमीन को जैविक किचन गार्डन में बदलकर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी। इसी से होने वाली कमाई से वे घर का खर्च और बीमार पति का इलाज दोनों संभाल रही हैं।
धान की रोपाई से पहले करें खेत की मिट्टी का शोधन, ये तीन जैविक उत्पाद हैं कारगर, कीटनाशक की भी नहीं पड़ेगी जरूरत
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक के अनुसार ट्राइकोडेर्मा, बवेरिया बासियाना और स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस नामक तीन जैविक उत्पादों से भूमि शोधन कर किसान बिना कीटनाशक के मिट्टी को स्वस्थ बना सकते हैं।
देर से बोई प्याज, फिर भी बंपर पैदावार: मऊ के किसान का कामयाब फॉर्मूला जानिए
मऊ के किसान रामलेश मौर्य ने फरवरी में देरी से रोपाई के बावजूद ड्रिप सिंचाई और बेड विधि अपनाकर एक समान आकार वाली प्याज की शानदार फसल उगाई और बाजार में अच्छी कीमत पा रहे हैं।
छत हो या बगीचा... कम जगह में उगाएं हरा कद्दू, बीज बोने के कुछ हफ्तों बाद ही खिलेंगे पीले फूल
अगर बाजार की महंगी और केमिकल वाली सब्जियों से परेशान हैं, तो अपने घर की छत या बालकनी में कद्दू उगाना शुरू करें। कम जगह और थोड़ी देखभाल में ही आपको ताजी, ऑर्गेनिक सब्जी मिल जाएगी।
सफेद कद्दू से तैयार होता है आगरा का प्रसिद्ध पेठा, कम लागत की खेती से किसान कमा रहे मोटा मुनाफा
आगरा के किसान तुलाराम के अनुसार बीज बोने के करीब 50 दिन बाद कद्दू निकलना शुरू हो जाता है और जैविक खेती व डीएपी खाद से फसल बेहतर होती है। सफेद कद्दू से बनने वाला पेठा मुगलकाल से दुनियाभर में मशहूर है।
704 बैंगन ने पलट दी छपरा के किसान सुरेंद्र की तकदीर! एक बार रोपाई और 3 साल तक मुनाफा, समझिए पूरी तरकीब
छपरा के गरखा प्रखंड के किसान सुरेंद्र सिंह VNR कंपनी की 704 बैंगन वैरायटी से जैविक खेती कर रहे हैं और 10 कट्ठा से ही बढ़िया कमाई कर रहे हैं। एक बार पौधा लगाने के बाद वे लगातार 2-3 साल तक इससे फलन लेकर मुनाफा कमाते हैं।
खेत बचाने की मुहिम: शिवहर में घर-घर पहुंचकर किसानों को सिखाई जा रही जैविक खेती
शिवहर में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुए 'खेत बचाओ अभियान' के तहत कृषि वैज्ञानिक खुद किसानों के घर पहुंचकर जैविक और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे रहे हैं। यह विशेष अभियान 30 जून तक चलेगा।
नौकरी की राह छोड़ खेती में बनाई पहचान, खीरा समेत इन फसलों से सालाना 15 लाख कमा रहे मुकेश
सीकर के युवा किसान मुकेश बाकोलिया ने सरकारी नौकरी न मिलने पर आधुनिक खेती को अपना करियर बनाया और आज वे खीरे की खेती से ही हर सीजन 7 से 8 लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं।
दोस्त से मिली एक बेल ने बदली तस्वीर, दरभंगा का परिवार 6 महीने से खा रहा घर की उगाई परवल
दरभंगा के नवीन कुमार पांडे ने आंगन में परवल की बेल लगाई और पिछले 6 महीने से उनका परिवार बाजार से बिना परवल खरीदे रोज ताजी और शुद्ध सब्जी खा रहा है। बिना रासायनिक खाद के उगी यह परवल सेहत के साथ-साथ बचत का भी जरिया बन गई है।
खेती की सलाह: जून-जुलाई में डालें गोबर की जैविक खाद, कम खर्च में पाएं हरी-भरी फसल और दोगुना उत्पादन
भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में किसान जून और जुलाई के महीने में खेतों में गोबर की जैविक खाद डाल रहे हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता और नमी सोखने की क्षमता बढ़ती है तथा कम लागत में बेहतर पैदावार मिलती है।
सिक्किम से मिली सीख दरभंगा में चमकी! युवा किसान आदित्य केंचुआ और जैविक खाद बेचकर कमा रहे दोहरा मुनाफा
दरभंगा के युवा किसान आदित्य कुमार ने वर्मी कंपोस्ट को व्यवसाय बनाकर अनोखी राह चुनी है। वे एक साथ जैविक खाद और केंचुए दोनों बेचकर हर महीने दोहरी आमदनी अर्जित कर रहे हैं।
एक लाख की लागत से चार लाख तक की कमाई! करेले की खेती से युवा किसान अजय ने पाई बड़ी सफलता
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के युवा किसान अजय ने करीब चार एकड़ में करेले की खेती की, जिसमें लगभग एक लाख रुपये लागत आई और अब तक उन्हें तीन से चार लाख रुपये का मुनाफा मिल चुका है, जबकि फसल की तुड़ाई अब भी जारी है।
धान की खेती की तैयारी: रोपाई से पहले खेत कैसे करें तैयार, जानिए विशेषज्ञ की सलाह से मुनाफे का रास्ता
खरीफ सीजन से पहले धान की बेहतर पैदावार पाने के लिए कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को खेत की जुताई, हरी खाद और रोपा पद्धति अपनाने की सलाह दी है। समय रहती नर्सरी तैयार करने और जैविक उपायों से लागत घटने के साथ मिट्टी की ताकत भी बढ़ती है।
एमपी का वह जैविक गांव, जहां कभी हर घर में बनती थी खाद, अब फैल रही रासायनिक खेती
मध्यप्रदेश का मलगांव कभी पूरे प्रदेश में 'जैविक ग्राम' के रूप में पहचाना जाता था, लेकिन आज यहां एक भी खेत पूरी तरह जैविक नहीं बचा और किसान रासायनिक खाद व कीटनाशकों पर निर्भर हो गए हैं।