उपनाम: जैविक खेती
72 साल की उम्र और किसानी के 50 बरस: हाईटेक फार्मिंग और वर्मी कंपोस्ट पर वैज्ञानिकों संग किया शोध
मधुबनी के बेनीपट्टी निवासी किसान आनंद चंद्र ठाकुर ने 50 वर्षों तक खेती की और 45 साल तक पूसा व हैदराबाद के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर वर्मी कंपोस्ट तथा हाईटेक खेती पर शोध किया। उनका दावा है कि उनकी और उनकी टीम की अवधारणा पर आज पूरा देश काम कर रहा है।
पति को खोने के बाद भीख तक मांगनी पड़ी, अब आत्मनिर्भर हैं मुनक्का देवी, चला रहीं अपना कारोबार
बहराइच के निबिया बेगमपुर गांव की मुनक्का देवी ने पति की मृत्यु के बाद बेहद कठिन दौर देखा, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आज वे गाय के गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद बनाकर अपना खुद का व्यवसाय चला रही हैं।
45 डिग्री की भीषण तपिश में भी हरी-भरी रहती है यह घास, जालौर के किसानों-पशुपालकों का बनी सहारा
जालौर के हरमू गांव में मिलने वाली धामण घास 45 डिग्री से अधिक तापमान में भी नहीं सूखती और गर्मियों में हरे चारे की कमी के बीच पशुपालकों व किसानों के लिए जीवनरेखा साबित हो रही है।
आगरा में किसान बिना केमिकल के उगा रहे जैविक देशी लौकी, नौ राज्यों तक पहुंचती है फसल
आगरा के किसान बिना किसी केमिकल और इंजेक्शन के जैविक खाद से देशी लौकी की खेती कर रहे हैं, जिसकी सप्लाई नौ राज्यों तक होती है। कम लागत और भारी मांग के चलते यह फसल किसानों को अच्छा मुनाफा दे रही है।
पहाड़ी खेती का असली साथी है गोबर की खाद! न यूरिया की जरूरत, न DAP की — सालों तक मिलता है फायदा
उत्तराखंड के ढलानदार और सीढ़ीदार खेतों में पैदावार बढ़ाने और मिट्टी की उर्वरता कायम रखने में पशुओं का गोबर सबसे कारगर साबित हो रहा है। यह प्राकृतिक खाद मिट्टी का कटाव रोकने के साथ-साथ कम लागत में बेहतर मुनाफे का रास्ता भी खोलती है।
घर पर बनने वाली ये जैविक खाद बचाएगी सेहत और किसानों की जेब, बेचकर भी हो रही कमाई
सारण के किसान रणजीत सिंह कृषि विज्ञान केंद्र मांझी से प्रशिक्षण लेकर गोबर, गोमूत्र, मिट्टी, गुड़ और पानी से कम बजट में जैविक खाद तैयार करते हैं और दूसरे किसानों को निशुल्क सिखाते भी हैं।
बुरहानपुर की 60 वर्षीय महिला किसान बनीं मिसाल, 5 एकड़ में जैविक खेती से हर साल कमा रहीं लाखों
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की एक तीसरी पास महिला किसान बीते 10 वर्षों से जैविक खेती कर रही हैं और 5 एकड़ जमीन से हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रही हैं।
मिर्च की फसल में भंगुरी रोग से न घबराएं, अपनाएं ये 3 असरदार उपाय
मिर्च की खेती में लगने वाले भंगुरी (येलो वेन मोजैक वायरस) रोग से बचाव के लिए पौधा संरक्षण अधिकारी ने तीन कारगर तरीके बताए हैं। जानिए कैसे करें इस रोग पर नियंत्रण।
एक एकड़ ने पलटी किस्मत: फरीदाबाद के किसान ने हल्दी की खेती से पाई नई राह
फरीदाबाद के फतेहपुर बिल्लौच गांव के किसान मुकेश कुमार ने गेहूं-धान छोड़कर एक एकड़ में ऑर्गेनिक हल्दी की खेती शुरू की और बिना रासायनिक खाद-दवा के शुद्ध हल्दी तैयार कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
सिरोही में जैविक अंजीर की खेती बनी किसानों की आमदनी का जरिया, कम पानी में मिल रहा भरपूर उत्पादन
अरावली की तलहटी में बसे सिरोही के आमथला गांव के तपोवन में करीब दो बीघा जमीन पर जैविक तरीके से अंजीर उगाई जा रही है। कम पानी, कम लागत और लगातार बनी रहने वाली मांग के चलते यह फसल किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।
गोबर की खाद से जैविक सब्जियों की खेती, किचन गार्डन से हर महीने अच्छी आमदनी—जानिए विमला की मिसाल
गोंडा की गृहिणी विमला मौर्य ने घर की खाली जमीन को जैविक किचन गार्डन में बदलकर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी। इसी से होने वाली कमाई से वे घर का खर्च और बीमार पति का इलाज दोनों संभाल रही हैं।
धान की रोपाई से पहले करें खेत की मिट्टी का शोधन, ये तीन जैविक उत्पाद हैं कारगर, कीटनाशक की भी नहीं पड़ेगी जरूरत
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक के अनुसार ट्राइकोडेर्मा, बवेरिया बासियाना और स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस नामक तीन जैविक उत्पादों से भूमि शोधन कर किसान बिना कीटनाशक के मिट्टी को स्वस्थ बना सकते हैं।
देर से बोई प्याज, फिर भी बंपर पैदावार: मऊ के किसान का कामयाब फॉर्मूला जानिए
मऊ के किसान रामलेश मौर्य ने फरवरी में देरी से रोपाई के बावजूद ड्रिप सिंचाई और बेड विधि अपनाकर एक समान आकार वाली प्याज की शानदार फसल उगाई और बाजार में अच्छी कीमत पा रहे हैं।
छत हो या बगीचा... कम जगह में उगाएं हरा कद्दू, बीज बोने के कुछ हफ्तों बाद ही खिलेंगे पीले फूल
अगर बाजार की महंगी और केमिकल वाली सब्जियों से परेशान हैं, तो अपने घर की छत या बालकनी में कद्दू उगाना शुरू करें। कम जगह और थोड़ी देखभाल में ही आपको ताजी, ऑर्गेनिक सब्जी मिल जाएगी।
सफेद कद्दू से तैयार होता है आगरा का प्रसिद्ध पेठा, कम लागत की खेती से किसान कमा रहे मोटा मुनाफा
आगरा के किसान तुलाराम के अनुसार बीज बोने के करीब 50 दिन बाद कद्दू निकलना शुरू हो जाता है और जैविक खेती व डीएपी खाद से फसल बेहतर होती है। सफेद कद्दू से बनने वाला पेठा मुगलकाल से दुनियाभर में मशहूर है।