704 बैंगन ने पलट दी छपरा के किसान सुरेंद्र की तकदीर! एक बार रोपाई और 3 साल तक मुनाफा, समझिए पूरी तरकीब बिहार एक घंटा पहले 3
छपरा के गरखा प्रखंड के किसान सुरेंद्र सिंह VNR कंपनी की 704 बैंगन वैरायटी से जैविक खेती कर रहे हैं और 10 कट्ठा से ही बढ़िया कमाई कर रहे हैं। एक बार पौधा लगाने के बाद वे लगातार 2-3 साल तक इससे फलन लेकर मुनाफा कमाते हैं।

बिहार के छपरा जिले के किसान अब परंपरागत खेती के साथ-साथ नगदी फसलों की ओर रुख कर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण लेकर वे नगदी फसलों में उन्नत किस्म के बीज लगा रहे हैं, जिससे फलन भी ज्यादा मिल रहा है और बाजार में बेचकर मुनाफा भी बढ़िया हो रहा है। इसी कड़ी में गरखा प्रखंड के अडूपुर गांव के किसान सुरेंद्र सिंह बड़े पैमाने पर नगदी फसल की खेती कर मिसाल बने हुए हैं।

सुरेंद्र सिंह लगभग 12 एकड़ में हरी सब्जियों की खेती करते हैं, जिसमें प्रतिदिन 25 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। इस समय उन्होंने 10 कट्ठा में 704 वैरायटी का बैंगन लगाया है, जिसका फलन काफी तगड़ा हो रहा है।

इस वैरायटी से होती है बंपर कमाई

704 बैंगन की वैरायटी सारण के किसानों की किस्मत बदल रही है। जैविक विधि से खेती करने पर इसमें बेहद अच्छा फलन मिलता है। इसके पौधे की ऊंचाई करीब 4:30 से 4:45 फीट तक पहुंच जाती है। इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक साल तक लगातार फल तोड़कर बेचा जा सकता है।

एक साल बाद जड़ से करीब 9 इंच ऊपर छोड़कर पौधे की कलम कर दी जाती है और फिर पानी तथा जैविक खाद डालने से उसमें नई डाल निकल आती है। इसके बाद दोबारा जोरदार फलन शुरू हो जाता है। इस तरह एक बार बैंगन लगाकर किसान 2-3 साल तक अच्छी कमाई कर सकते हैं।

किसान सुरेंद्र की जुबानी

सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि वे जैविक विधि से ही हरी सब्जियों की खेती करते हैं। उन्होंने VNR कंपनी की 704 वैरायटी का बैंगन लगाया है। यह किस्म खूब फलन देती है और फल की लंबाई 8 से 9 इंच तक होती है। इसमें जल्दी बीज नहीं आता और इसकी सब्जी काफी स्वादिष्ट होती है।

किसान के मुताबिक इस वैरायटी को लगाने के लिए जून का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। रोपाई के 60 दिनों बाद इसमें फलन शुरू हो जाता है और उसके बाद पूरे एक साल तक फल तोड़कर बेचा जा सकता है।

1 कट्ठा में सिर्फ 800 की लागत

सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि मार्च तक फल तोड़ने के बाद पौधे की कटिंग कर दें, फिर पानी और जैविक खाद डालकर छोड़ दें—नई डाल आ जाएगी और दोबारा तगड़ा फलन शुरू हो जाएगा। फिलहाल उन्होंने 10 कट्ठा में बैंगन लगाया है, जहां वे हर चार दिन बाद 80 किलो से लेकर 1 क्विंटल तक बैंगन तोड़कर बेचते हैं।

बैंगन की खेती में एक कट्ठा पर करीब 7 से 800 रुपए का खर्च आता है, जबकि एक ही बार के फलन में पूरी लागत निकल जाती है।

खेत से ही बिक जाती है फसल

किसान का कहना है कि सब्जी बेचने के लिए बाजार तक जाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। वे बड़े पैमाने पर खेती करते हैं, इसलिए आसपास के व्यापारी उन्हें जानते हैं और खेत से ही आकर सब्जी खरीद ले जाते हैं।

बुवाई, घास निकालने और अन्य कामों के लिए वे रोजाना करीब 25 लोगों को रोजगार देते हैं। आज उनके साथ 50 से अधिक लोग जुड़कर कमाई कर रहे हैं। अगर इसी तरीके से खेती की जाए तो किसान अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकते हैं। उनका यह तरीका आसपास के दूसरे किसानों को भी खूब भा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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