उपनाम: जैविक खेती
रांची: गोबर और नीम से सावित्री ने बदली अपनी तकदीर, खड़ी की सफल जैविक खेती की कंपनी
रांची के बेड़ों गांव की रहने वाली सावित्री खजूर ने मजदूरी का काम छोड़कर जैविक खेती में अपना करियर बनाया है और अब हर महीने 50 हजार रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं।
Farming Tips: सिर्फ 75 हजार रुपये लगाकर कमाएं 2 लाख, बहराइच के किसान सियाराम ने देसी केले की खेती से बदली अपनी किस्मत
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के किसान सियाराम ने पारंपरिक फसलों से हटकर देसी केले की जैविक खेती अपनाई और बेहद कम लागत में बंपर मुनाफा कमाकर दूसरों के लिए एक मिसाल पेश की है।
छपरा के किसान ने किया कमाल: मात्र 5 कट्ठे में उगाई 'राधिका' भिंडी, जैविक खाद के दम पर हर हफ्ते मिल रही 2 क्विंटल बंपर पैदावार
बिहार के छपरा जिले के एक किसान ने घरेलू जैविक खाद और 'राधिका' हाइब्रिड बीज का इस्तेमाल कर मात्र 5 कट्ठा खेत से हर हफ्ते 2 क्विंटल भिंडी की पैदावार हासिल कर सबको चौंका दिया है।
वर्मी कंपोस्ट बनाने वाले किसान रहें अलर्ट, बारिश के मौसम में इन गलतियों से मर सकते हैं आपके केंचुए
मानसून के दौरान वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, नमी और जलभराव के प्रबंधन में थोड़ी सी भी चूक केंचुओं की जान ले सकती है और आपकी पूरी मेहनत बर्बाद कर सकती है।
जुलाई में शुरू करें खस की खेती, आवारा पशुओं का डर नहीं और डेढ़ साल में हो जाएंगे मालामाल
अगर आपके पास बंजर या पथरीली जमीन है और आप आवारा पशुओं की समस्या से परेशान हैं, तो खस की खेती आपके लिए कमाई का बेहतरीन जरिया बन सकती है। जुलाई का महीना इसकी रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त है और डेढ़ साल की मेहनत के बाद किसान लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं।
रांची में मिला अनोखा डीजल देने वाला पेड़, ग्रामीणों के लिए किसी खजाने से कम नहीं
रांची के इटकी गांव में एक विशेष पेड़ पाया जाता है जिसके बीज से डीजल और प्राकृतिक औषधियां बनाई जाती हैं। ग्रामीण इसे एक बहुउद्देशीय रामबाण औषधि मानकर इस्तेमाल करते हैं।
वर्मी कंपोस्ट बनाने वाले किसान सावधान: बरसात में इन गलतियों से हो सकता है केंचुओं का सफाया
बरसात के मौसम में वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करते समय किसानों को खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है। थोड़ी सी चूक से न केवल केंचुए मर सकते हैं, बल्कि पूरी खाद भी खराब हो सकती है।
BSc Agriculture की डिग्री धरी रह गई, नौकरी छोड़ शुरू की जैविक गन्ने की खेती और कमा रहे हैं मोटा मुनाफा
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के रहने वाले युवा किसान हरिओम मिश्रा ने कृषि विज्ञान में पढ़ाई करने के बाद पारंपरिक नौकरी के बजाय खेती में अपनी किस्मत आजमाई। आज वे 3 एकड़ जमीन पर जैविक तरीके से गन्ने की खेती कर रहे हैं और लाखों रुपये की कमाई कर अन्य किसानों के ल...
मात्र 50 रुपये में बीज बनेंगे शक्तिशाली, बुवाई से पहले आजमाएं यह खास देसी नुस्खा
छत्तीसगढ़ के एक युवा किसान ने बीजोपचार का बेहद किफायती और असरदार देसी तरीका साझा किया है, जिससे फसल का उत्पादन बेहतर होता है और लागत में बड़ी कमी आती है।
मुरादाबाद के किसान अश्वनी ठाकुर की अनोखी पहल, दो एकड़ जमीन पर कर रहे ऑर्गेनिक हल्दी की खेती
मुरादाबाद के किसान अश्वनी ठाकुर अपनी दो एकड़ जमीन पर प्राकृतिक तरीके से हल्दी उगाकर बाजार में बेच रहे हैं, जिसकी भारी मांग है।
रांची के कुलदीप का कमाल: महज 2 डेसिमल जमीन पर उगा रहे 15 तरह की सब्जियां, दूध और पनीर के लिए भी नहीं है बाजार पर निर्भर
रांची निवासी कुलदीप ने अपनी छोटी सी जमीन पर किचन गार्डन विकसित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है, जहां वे जैविक खाद और स्मार्ट तकनीकों से भरपूर सब्जियां उगा रहे हैं।
सफलता की कहानी: रांची की सावित्री जो कभी करती थीं दूसरों के खेतों में मजदूरी, आज जैविक खेती से कमा रहीं 50000 रुपये महीना
रांची के बेड़ों गांव की रहने वाली सावित्री खजूर ने कड़ी मेहनत और जैविक खेती के दम पर अपनी तकदीर बदल दी है। कभी मजदूरी करने वाली सावित्री आज खुद की नर्सरी और जैविक खाद के व्यवसाय से हर महीने 50000 रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं।
खेती में पानी की समस्या का पक्का समाधान, किसानों के लिए वरदान बना हाइड्रोजेल
बदलते मानसून और घटते जल स्तर के बीच हाइड्रोजेल तकनीक किसानों को सूखे से निपटने में मदद कर रही है। यह मिट्टी में लंबे समय तक नमी बरकरार रखकर फसलों को पानी की कमी से बचाता है।
आवारा जानवरों से फसलों को सुरक्षित रखना हुआ आसान, खेत की मेड़ पर लगाएं बेशर्म का पौधा
खेत की मेड़ पर बेशर्म या बेहया का पौधा लगाकर किसान आवारा जानवरों और नीलगाय से अपनी फसल को प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रख सकते हैं। यह कम लागत वाला और बेहद कारगर तरीका है जो मिट्टी के कटाव को रोकने में भी सहायक है।
ससुराल का मिला साथ तो बदल गई लाल परी की दुनिया, आज कृषि सखी बनकर सैकड़ों किसानों को सिखा रही हैं जैविक खेती के गुर
श्रावस्ती के एक छोटे से गांव से बहराइच की बहू बनी लाल परी ने अपनी मेहनत और परिवार के सहयोग से मिसाल कायम की है। आज वे कृषि सखी के रूप में अन्य किसानों को रसायन मुक्त खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं।