उपनाम: जैविक खेती
मुरादाबाद के किसान अश्वनी ठाकुर की अनोखी पहल, दो एकड़ जमीन पर कर रहे ऑर्गेनिक हल्दी की खेती
मुरादाबाद के किसान अश्वनी ठाकुर अपनी दो एकड़ जमीन पर प्राकृतिक तरीके से हल्दी उगाकर बाजार में बेच रहे हैं, जिसकी भारी मांग है।
रांची के कुलदीप का कमाल: महज 2 डेसिमल जमीन पर उगा रहे 15 तरह की सब्जियां, दूध और पनीर के लिए भी नहीं है बाजार पर निर्भर
रांची निवासी कुलदीप ने अपनी छोटी सी जमीन पर किचन गार्डन विकसित कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है, जहां वे जैविक खाद और स्मार्ट तकनीकों से भरपूर सब्जियां उगा रहे हैं।
सफलता की कहानी: रांची की सावित्री जो कभी करती थीं दूसरों के खेतों में मजदूरी, आज जैविक खेती से कमा रहीं 50000 रुपये महीना
रांची के बेड़ों गांव की रहने वाली सावित्री खजूर ने कड़ी मेहनत और जैविक खेती के दम पर अपनी तकदीर बदल दी है। कभी मजदूरी करने वाली सावित्री आज खुद की नर्सरी और जैविक खाद के व्यवसाय से हर महीने 50000 रुपये से अधिक की कमाई कर रही हैं।
खेती में पानी की समस्या का पक्का समाधान, किसानों के लिए वरदान बना हाइड्रोजेल
बदलते मानसून और घटते जल स्तर के बीच हाइड्रोजेल तकनीक किसानों को सूखे से निपटने में मदद कर रही है। यह मिट्टी में लंबे समय तक नमी बरकरार रखकर फसलों को पानी की कमी से बचाता है।
आवारा जानवरों से फसलों को सुरक्षित रखना हुआ आसान, खेत की मेड़ पर लगाएं बेशर्म का पौधा
खेत की मेड़ पर बेशर्म या बेहया का पौधा लगाकर किसान आवारा जानवरों और नीलगाय से अपनी फसल को प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रख सकते हैं। यह कम लागत वाला और बेहद कारगर तरीका है जो मिट्टी के कटाव को रोकने में भी सहायक है।
ससुराल का मिला साथ तो बदल गई लाल परी की दुनिया, आज कृषि सखी बनकर सैकड़ों किसानों को सिखा रही हैं जैविक खेती के गुर
श्रावस्ती के एक छोटे से गांव से बहराइच की बहू बनी लाल परी ने अपनी मेहनत और परिवार के सहयोग से मिसाल कायम की है। आज वे कृषि सखी के रूप में अन्य किसानों को रसायन मुक्त खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं।
छपरा के किसान ने बदली तकदीर, जैविक विधि से मौसमी की खेती कर कमा रहे हैं मुनाफा
बिहार के छपरा जिले के एक प्रगतिशील किसान ने पारंपरिक खेती को छोड़कर जैविक तरीके से मौसमी के बाग लगाए हैं, जिससे उन्हें महज तीन साल में शानदार पैदावार मिल रही है।
खेती के साथ शुरू करें अपना बिजनेस, केवल 5 डिसमिल जमीन में होगी लाखों की कमाई
झारखंड की राजधानी रांची में प्रदान संस्था ने किसानों के लिए एक अभिनव बिजनेस मॉडल पेश किया है, जिसमें मात्र 5 डिसमिल जमीन पर पॉलीहाउस, नर्सरी और वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाकर मोटी कमाई की जा सकती है।
मानसून की देरी से चिंतित हैं किसान? धान के साथ अपनाएं ये खेती का तरीका, मुनाफा होगा पक्का
छत्तीसगढ़ में मानसून की सुस्त चाल को देखते हुए विशेषज्ञ किसानों को कम अवधि वाली धान की किस्मों और साथ में दलहन-तिलहन उगाने की सलाह दे रहे हैं। यह तरीका न केवल जोखिम कम करेगा बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाएगा।
छपरा के किसानों की मालामाल करने वाली खेती: ओल की इस खास किस्म से हो रही बंपर कमाई
बिहार के छपरा जिले में किसान हाइब्रिड गजेंद्रा किस्म के ओल की खेती से अच्छी आमदनी कर रहे हैं। जैविक तरीके से उगाई जाने वाली इस फसल में प्रति कट्ठा 16 क्विंटल तक पैदावार मिल रही है।
प्राकृतिक खेती से कैसे बढ़ाएं मुनाफा, पद्मश्री सम्मानित किसान ने साझा की अपनी रणनीति
बढ़ती लागत और मिट्टी की सेहत को लेकर चिंतित किसानों के लिए प्राकृतिक खेती एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है। पद्मश्री से सम्मानित प्रगतिशील किसान भारत भूषण त्यागी ने बताया कि कैसे यह पद्धति न केवल खर्च कम करती है, बल्कि लोगों को सेहतमंद जीवन भी प्रदान करती है।
खंडवा की महिलाओं का कमाल: जलकुआ गांव की जैविक तुलसी अब विदेशों में मचा रही धूम
मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव की महिलाओं ने जैविक तुलसी की खेती के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना ली है। आज यहां का उत्पाद यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में निर्यात किया जा रहा है।
केमिकल खाद को कहें अलविदा, घर पर इन 3 आसान तरीकों से तैयार करें बेहतरीन जैविक खाद
बुरहानपुर के कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, किसान अब घर पर ही जैविक खाद बनाकर अपनी फसल की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं और लाखों की कमाई कर सकते हैं।
रासायनिक खादों को कहें अलविदा, इस खास जैविक नुस्खे से 30 प्रतिशत तक बढ़ेगी फसल की पैदावार
कृषि विशेषज्ञों ने कम खर्च में तैयार होने वाले एक जैविक टॉनिक के इस्तेमाल की सलाह दी है, जिससे फसलों में फूलों के झड़ने की समस्या पर रोक लगाई जा सकती है।
खेती की लागत घटाने का जादुई उपाय, घर पर 20 दिन में तैयार करें गोबर वाली खाद
महंगे रासायनिक खादों से परेशान किसानों के लिए घनजीवामृत एक बेहतरीन विकल्प है। गाय के गोबर से बनने वाली यह जैविक खाद न केवल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाती है, बल्कि खेती के खर्च को भी आधा कर देती है।