धान की खेती की तैयारी: रोपाई से पहले खेत कैसे करें तैयार, जानिए विशेषज्ञ की सलाह से मुनाफे का रास्ता छत्तीसगढ़ 52 मिनट पहले 2
खरीफ सीजन से पहले धान की बेहतर पैदावार पाने के लिए कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को खेत की जुताई, हरी खाद और रोपा पद्धति अपनाने की सलाह दी है। समय रहती नर्सरी तैयार करने और जैविक उपायों से लागत घटने के साथ मिट्टी की ताकत भी बढ़ती है।

छत्तीसगढ़ को यूं ही ‘धान का कटोरा’ नहीं कहा जाता। यहां के किसान खरीफ सीजन में सबसे अधिक धान की पैदावार लेते हैं। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के किसानों ने अब धान की खेती के लिए खेत तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। बेहतर उपज पाने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ खास तरीके अपनाने की सलाह दी है।

खेत की तैयारी कैसे करें

कृषि वैज्ञानिक संजय यादव के अनुसार खरीफ सीजन की तैयारी में सबसे पहला कदम खेत की अच्छी जुताई है। मौजूदा समय में तेज धूप पड़ रही है, ऐसे में एमबी प्लाऊ से मिट्टी पलटने पर कीट और रोगों को जन्म देने वाले कारक नष्ट हो जाते हैं।

अगर किसानों के पास गोबर खाद उपलब्ध है, तो उसे पूरे खेत में समान रूप से बिखेरकर एक-दो बार कल्टीवेटर चलाना चाहिए। इससे मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। विशेषज्ञ की सलाह है कि मानसून आने से पहले खेत में एक बार और कल्टीवेटर चलाया जाए, ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए और बीजों का अंकुरण बेहतर तरीके से हो सके। किसान अपनी सुविधा और संसाधनों के मुताबिक खुर्रा बोनी, लेही या रोपा विधि से बुवाई कर सकते हैं।

रोपा विधि से ज्यादा फायदा

संजय यादव बताते हैं कि धान की रोपा पद्धति अपनाने वाले किसान यदि समय रहते नर्सरी तैयार कर लें, तो उन्हें बेहतर उत्पादन मिलता है। इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, ताकि रोपाई के वक्त स्वस्थ पौधे उपलब्ध रहें।

ढैंचा और मूंग से बनेगी प्राकृतिक खाद

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने किसानों को ढैंचा और मूंग की बुवाई करने की सलाह दी है। जिन खेतों में सिंचाई की सुविधा है, वहां किसान इन फसलों की बुवाई अभी कर सकते हैं। करीब 40 से 45 दिन बाद जब यह फसल तैयार हो जाए, तब इसे खेत में ही पलटकर मिला देना चाहिए। इससे हरी खाद तैयार होती है, और उसी दौरान तैयार हुई धान की नर्सरी को खेत में रोपा जा सकता है।

बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरा शक्ति

कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक हरी खाद के इस्तेमाल से रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम हो जाती है, जिससे किसानों की लागत घटती है। साथ ही खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और मिट्टी की भौतिक संरचना में भी सुधार आता है। लंबे समय तक अच्छी पैदावार लेने के लिहाज से यह तकनीक बेहद फायदेमंद साबित होती है।

पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद

संजय यादव का कहना है कि जैविक तत्वों से समृद्ध भूमि में उगने वाली फसलों में पोषक तत्वों की मात्रा बेहतर होती है। इससे किसानों को आर्थिक लाभ तो मिलता ही है, साथ ही मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। यही वजह है कि किसानों को खरीफ सीजन से पहले वैज्ञानिक सलाह के अनुसार खेत की तैयारी और जैविक उपाय अपनाने चाहिए।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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