छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
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ग्रामीण इलाकों में आज भी ज्यादातर किसान घुरुवा में इकट्ठा हुए सूखे गोबर को सीधे अपने खेतों में डाल देते हैं। लेकिन कृषि जानकारों और जैविक खेती से जुड़े किसानों का मानना है कि इस तरीके से खेत को उतना फायदा नहीं मिल पाता, जितना मिलना चाहिए। कई बार अधपके गोबर के इस्तेमाल से खेतों में हानिकारक कीटों और खरपतवारों की परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में गोबर को वैज्ञानिक ढंग से सुपर कंपोस्ट खाद में तब्दील करके इस्तेमाल किया जाए तो मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, फसलों को संतुलित पोषण मिलता है और पैदावार में भी सुधार दिखाई देता है।
बिलासपुर जिले की नगर पंचायत मल्हार के रहने वाले किसान जदूनंदन प्रसाद वर्मा लंबे समय से जैविक खेती कर रहे हैं। वे अपने खेत में सुपर कंपोस्ट खाद का उपयोग कर बेहतर नतीजे हासिल कर रहे हैं।
सीधे गोबर डालने से क्यों नहीं मिलता पूरा लाभ
किसान जदूनंदन प्रसाद वर्मा बताते हैं कि घुरुवा में पड़ा सूखा गोबर पूरी तरह विघटित नहीं हो पाता। इसे सीधे खेत में डालने पर पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इसके साथ ही कई तरह के हानिकारक कीट, रोगजनक तत्व और खरपतवार के बीज भी खेत तक पहुंच जाते हैं, जिनसे फसल पर बुरा असर पड़ता है।
सुपर कंपोस्ट खाद बनाने का आसान तरीका
सुपर कंपोस्ट खाद तैयार करने के लिए गोबर, सूखी पत्तियां, फसल अवशेष और दूसरे जैविक पदार्थों को किसी गड्ढे या तय जगह पर परत-दर-परत जमाया जाता है। इसके ऊपर समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है ताकि उसमें नमी बनी रहे। खाद को नियमित अंतराल पर पलटने से सड़न की प्रक्रिया तेज होती है और कुछ ही हफ्तों में उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनकर तैयार हो जाती है।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में असरदार
सुपर कंपोस्ट खाद मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाती है। इससे मिट्टी की संरचना सुधरती है, पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है और पौधों की जड़ों का विकास बेहतर होता है। यह खाद लंबे समय तक खेत की उत्पादकता बनाए रखने में मददगार साबित होती है।
रासायनिक खादों पर निर्भरता होगी कम
जैविक खाद के नियमित इस्तेमाल से किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है। इससे खेती की लागत कम होती है और पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचता। साथ ही फसलों की गुणवत्ता बेहतर होने से बाजार में अच्छी कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
हर किसान आसानी से अपना सकता है यह तकनीक
किसान जदूनंदन प्रसाद वर्मा का कहना है कि अगर किसान घुरुवा के गोबर को सीधे खेत में डालने के बजाय उससे सुपर कंपोस्ट खाद बनाकर इस्तेमाल करें तो उन्हें बेहतर उत्पादन और स्वस्थ मिट्टी, दोनों का लाभ मिलेगा। उनके मुताबिक यह कम लागत वाली तकनीक है, जिसे हर किसान बेहद आसानी से अपना सकता है।
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