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एक घंटा पहले
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विचारों
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक युवा किसान ने अपनी पढ़ाई और लगन के बल पर खेती को एक नई दिशा दी है। विकासखंड रुपईडीह की ग्राम पंचायत लालनगर के रहने वाले इस किसान ने बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी तलाशने के बजाय खेती को ही अपना पेशा चुना। आज वे जैविक पद्धति से गन्ने की खेती कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं और आसपास के किसानों के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं।
पढ़ाई की तकनीक को खेत में उतारा
युवा किसान हरिओम मिश्रा का मानना है कि अगर खेती को वैज्ञानिक ढंग से किया जाए तो उससे कहीं बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने पढ़ाई के दौरान सीखी आधुनिक तकनीकों को अपने खेत में अपनाया। उन्होंने रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल घटाते हुए जैविक खेती को प्राथमिकता दी। इसके लिए वे गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक घोल का उपयोग कर रहे हैं।
जैविक खेती से बढ़ी उर्वरता
हरिओम मिश्रा बताते हैं कि जैविक खेती से जमीन की उर्वरता बनी रहती है और उपज की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। शुरुआत में उन्हें कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे नतीजे अच्छे आने लगे। गन्ने की फसल अधिक स्वस्थ रहने लगी और लागत भी घटती गई, जिससे उनकी आमदनी लगातार बढ़ती चली गई।
फसल की देखभाल का तरीका
गन्ने की खेती के लिए हरिओम ने खेत की अच्छी जुताई और तैयारी की। उन्होंने समय पर बुवाई, सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण पर खास ध्यान दिया। खेत में नियमित रूप से जैविक खाद डाली जाती है और फसल की निरंतर निगरानी की जाती है, ताकि किसी भी बीमारी या कीट के हमले का समय रहते उपचार किया जा सके।
लागत और कमाई का गणित
हरिओम मिश्रा के मुताबिक फिलहाल वे लगभग 3 एकड़ में गन्ने की खेती कर रहे हैं और इस समय 14201 वैरायटी का गन्ना उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 3 एकड़ में गन्ने की खेती पर करीब 60 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि इससे लगभग 2 से 2.5 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है।
सीधे खेत से बिक्री और अतिरिक्त आय
हरिओम का कहना है कि जैविक तरीके से उगाए गए गन्ने की मांग लगातार बढ़ रही है। कई व्यापारी और स्थानीय खरीदार सीधे खेत पर आकर गन्ना खरीद लेते हैं, जिससे उन्हें उपज का बेहतर दाम मिल जाता है। गन्ने के साथ वे कुछ अन्य फसलें भी उगाते हैं, जिससे उनकी आय के स्रोत और बढ़ गए हैं। आज उनकी मेहनत रंग ला रही है और वे सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।
दूसरे किसानों के लिए मिसाल
हरिओम की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान भी जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। वे समय-समय पर दूसरे किसानों को खेती से जुड़ी जानकारियां देते हैं और उन्हें जैविक खेती के फायदे समझाते हैं।
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