धरोहर: श्मशान घाट के पास हजार साल पुराना शिव मंदिर, अपने भीतर समेटे है इतिहास की अनसुनी दास्तान राजस्थान एक घंटा पहले 5
उदयपुर के सबसे पुराने श्मशान घाट के पास खड़ा करीब एक हजार वर्ष पुराना यह शिव मंदिर अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला, दुर्लभ शिल्प और पास की प्राचीन बावड़ी के कारण शहर की अनमोल विरासत माना जाता है। आस्था और संस्कृति का यह केंद्र आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करता है।

झीलों और महलों के लिए दुनियाभर में मशहूर उदयपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए भी जाना जाता है, लेकिन शहर में कुछ विरासतें ऐसी भी हैं जो भीड़भाड़ से दूर रहकर भी अपने भीतर सदियों का इतिहास समेटे हुए हैं। ऐसा ही एक प्राचीन शिव मंदिर उदयपुर के सबसे पुराने और बड़े श्मशान घाट के पास स्थित है। श्मशान की निस्तब्धता के बीच खड़ा यह मंदिर धार्मिक आस्था का प्रतीक होने के साथ-साथ शहर की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का भी साक्षी माना जाता है।

करीब एक हजार वर्ष पुराना निर्माण

स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण करीब एक हजार वर्ष पूर्व कराया गया था। मान्यता है कि यह मंदिर उस दौर का है जब इस क्षेत्र में शिव उपासना का विशेष महत्व था। मंदिर में स्थापित भगवान शिव की प्रतिमा अत्यंत प्राचीन मानी जाती है।

वर्षों से यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। महाशिवरात्रि सहित अनेक पर्वों पर बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

पत्थरों में झलकती दुर्लभ शिल्पकला

मंदिर की वास्तुकला अपने आप में विशेष है। पत्थरों से बनी इस प्राचीन संरचना पर समय की मार साफ नजर आती है, फिर भी इसकी भव्यता आज भी कायम है। मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर बनी पुरानी कलाकृतियां उस दौर की शिल्पकला की झलक पेश करती हैं।

इतिहासकारों का मानना है कि ऐसे मंदिर उस समय की सामाजिक और धार्मिक जीवनशैली को समझने का अहम माध्यम होते हैं।

मंदिर जितनी ही पुरानी बावड़ी

इस मंदिर की एक और खास पहचान इसके पास स्थित प्राचीन बावड़ी है। बताया जाता है कि यह बावड़ी भी मंदिर जितनी ही पुरानी है। कभी यह आसपास के लोगों के लिए जल का प्रमुख स्रोत हुआ करती थी। बावड़ी की सीढ़ियां और पत्थर से बनी संरचना आज भी उस दौर की जल संरक्षण तकनीकों की कहानी बयां करती हैं। समय के साथ इसका उपयोग भले ही कम हो गया, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व अब भी बना हुआ है।

आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष स्थान

श्मशान घाट के पास होने के कारण यह स्थान आध्यात्मिक रूप से भी विशेष माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव की आराधना जीवन और मृत्यु के शाश्वत सत्य का संदेश देती है। यही वजह है कि वर्षों से यह मंदिर श्रद्धालुओं, साधु-संतों और इतिहास प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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