सिविल इंजीनियर बनने का सपना? JEE मेन में 10 लाख रैंक तक भी मिल सकती है सिविल ब्रांच, समझें पूरी प्रक्रिया करियर एक घंटा पहले 2
जेईई-मेन में कम स्कोर या 10 लाख तक रैंक लाने वाले छात्र भी बिहार के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिविल ब्रांच पा सकते हैं। सही काउंसलिंग रणनीति से कम रैंक पर भी सरकारी सीट पक्की की जा सकती है।

इंजीनियर बनने का सपना देख रहे छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। अगर जेईई एडवांस में सफलता नहीं मिली, तब भी बिहार के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में जेईई मेन की रैंक के आधार पर दाखिला लेकर यह सपना पूरा किया जा सकता है। राज्य के अलग-अलग जिलों में खुले नए कॉलेजों और सीटों की अधिक संख्या के चलते, सही काउंसलिंग रणनीति अपनाकर कम रैंक वाले छात्र भी सरकारी कॉलेज में अपनी सीट सुरक्षित कर सकते हैं।

हर जिले में मौजूद हैं इंजीनियरिंग कॉलेज

बिहार के लगभग हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज मौजूद है, जहां जेईई मेन और बीसीईसीई की रैंक के आधार पर नामांकन किया जाता है। राज्य के टॉप फाइव इंजीनियरिंग कॉलेजों में शामिल गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में जेईई मेन की 90 हजार से 10 लाख रैंक के बीच के छात्रों का दाखिला होता है।

सिविल ब्रांच के लिए रहती है छात्रों में होड़

गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की सिविल ब्रांच में दाखिले को लेकर छात्रों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। पिछले दो साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो जेईई मेन में 1 लाख से 10 लाख के बीच रैंक हासिल करने वाले छात्रों को सिविल ब्रांच मिली है।

सिविल इंजीनियरिंग बिहार में एक प्रमुख और बेहद मांग वाली शाखा मानी जाती है। यह सड़क, पुल और इमारत जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण और योजना से जुड़ी ब्रांच है। इस कोर्स को पूरा करने के बाद अधिकांश छात्र सरकारी नौकरी की ओर रुख करते हैं और राज्य में इसका दायरा भी काफी बड़ा है।

रोजगार के बढ़ते अवसर

देश और राज्य में बन रहे नए एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन परियोजनाएं, एयरपोर्ट, स्मार्ट सिटी और सड़कों, पुलों व भवनों जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ-साथ रियल एस्टेट के विस्तार के कारण सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए प्लेसमेंट के शानदार मौके बन रहे हैं।

इसके अलावा जूनियर इंजीनियर से लेकर सरकारी ठेकेदार और निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों तक में काम करके बेहतरीन करियर बनाया जा सकता है। हाल के वर्षों में निजी क्षेत्र में भी सिविल इंजीनियरों की मांग तेजी से बढ़ी है।

इस बार कैसी रहेगी रैंक की स्थिति

गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णा प्रसाद ने बातचीत में बताया कि बिहार के ज्यादातर छात्र सरकारी नौकरी में जाना चाहते हैं, इसी वजह से सिविल ब्रांच की मांग सबसे अधिक रहती है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों में सबसे ज्यादा रिक्तियां सिविल इंजीनियरों के लिए ही निकलती हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि इस कॉलेज में सिविल ब्रांच की 120 सीटों पर दाखिला होता है। उम्मीद है कि इस बार भी 1 लाख से 10 लाख के बीच रैंक वाले छात्रों को यहां प्रवेश मिल जाएगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!