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एक घंटा पहले
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। स्थानीय प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे सस्ती बिजली और सस्ते आटे की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें जवाब में गोलियां मिल रही हैं। महंगाई के खिलाफ शुरू होने वाले आंदोलन से पहले ही पाकिस्तानी प्रशासन दमनकारी रुख अपनाने लगा है।
कफन बांट रहे प्रदर्शनकारी
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांग सिर्फ सस्ती बिजली और सस्ता आटा है, मगर बदले में उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। रावलाकोट में रेंजर्स की गोलाबारी में 4 युवक घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए सीएमएच में भर्ती कराया गया है। अब प्रदर्शनकारी 9 जून के प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए आपस में कफन बांट रहे हैं, जो उनके इरादों की गंभीरता को दर्शाता है।
‘जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ ने 9 जून को बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। पाकिस्तानी सरकार और स्थानीय प्रशासन इस प्रदर्शन को हर हाल में रोकना चाहते हैं और इसी मकसद से पूरे क्षेत्र में बड़ी संख्या में सेना तथा रेंजर्स के जवान तैनात किए गए हैं।
तय तारीख से पहले ही शुरू हुआ विरोध
9 जून को होने वाले बड़े बंद से पहले ही कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं और आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। इसी को देखते हुए संगठन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे लंबे शटडाउन का सामना करने के लिए कम से कम एक महीने का जरूरी राशन और सामान पहले से जमा कर लें।
प्रशासन के कड़े कदम
प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए हैं। सबसे पहले आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही लोगों के आपसी संपर्क को रोकने के लिए मुजफ्फराबाद, मीरपुर और कोटली जैसे जिलों समेत पूरे इलाके में मोबाइल इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई हैं। मुजफ्फराबाद जैसे प्रमुख शहरों में फेडरल पुलिस और रेंजर्स के जवान तैनात किए गए हैं।
कई इलाकों में कर्फ्यू की तैयारी
प्रशासन कई इलाकों में कर्फ्यू लगाने जैसी तैयारियां भी कर रहा है। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए 5 जून से 20 जून तक सैलानियों के आने पर रोक लगा दी गई है, वहीं पहले से मौजूद पर्यटकों को तुरंत क्षेत्र छोड़ने की हिदायत दी गई है।
एक नेता की मौत, कई गिरफ्तारियां
विरोध को दबाने के लिए सुरक्षा बलों ने आंदोलन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ धरपकड़ शुरू कर दी है। इसी क्रम में रावलकोट में देर रात की गई एक कार्रवाई के दौरान अवामी एक्शन कमेटी के सदस्य शाहज़ेब हबीब की मौत हो गई। उमर नजीर नाम के एक अन्य सदस्य समेत सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कई इलाकों से कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की खबरें भी सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन बल प्रयोग कर जनता की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहा है।
आंदोलनकारियों की चेतावनी और 38 मांगें
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि पाकिस्तानी प्रशासन 9 जून के प्रदर्शन को लेकर बेहद घबराया हुआ है। संगठन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती, तब तक क्षेत्र में किसी भी नेता या पार्टी को चुनावी रैली करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि व्यापारियों, वकीलों और आम नागरिकों के इस संगठन ने पिछले साल अक्टूबर में सरकार के सामने अपनी 38 मांगें रखी थीं, जिन्हें लेकर यह पूरा विवाद चल रहा है।
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