उपनाम: राजस्थान विरासत
जयपुर की निराली विरासत: जहां शाही श्मशान भी बना पर्यटन का केंद्र, हर साल पहुंचते हैं हजारों सैलानी
जयपुर की गेटोर की छतरियां कछवाहा राजवंश के राजा-रानियों की स्मृति में बने भव्य स्मारक हैं, जो अपनी कलात्मक नक्काशी और स्थापत्य सौंदर्य के कारण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
स्वर्ण बावड़ी: जालोर की रहस्यमयी बावड़ियां, जिनमें आज भी जीवित है वीरमदेव की बहनों के बलिदान की गाथा
जालोर की स्वर्ण बावड़ी और झालर-कोलर बावड़ी केवल प्राचीन जल स्रोत नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और बलिदान की जीवंत निशानी हैं. लोक मान्यता इन्हें राजा वीरमदेव चौहान की बहनों के त्याग से जोड़ती है.
कोटा की शान: पेंटिंग से लेकर डोरिया साड़ी और गढ़ पैलेस तक, जानें हाड़ौती की सांस्कृतिक विरासत
राजस्थान का कोटा शहर अपनी जीवंत चित्रकला, कोटा डोरिया बुनाई, शाही स्थापत्य और लोक नृत्य के लिए देशभर में पहचाना जाता है। यहाँ की कला और परंपराएँ हाड़ौती की समृद्ध संस्कृति की झलक पेश करती हैं।
धरोहर: श्मशान घाट के पास हजार साल पुराना शिव मंदिर, अपने भीतर समेटे है इतिहास की अनसुनी दास्तान
उदयपुर के सबसे पुराने श्मशान घाट के पास खड़ा करीब एक हजार वर्ष पुराना यह शिव मंदिर अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला, दुर्लभ शिल्प और पास की प्राचीन बावड़ी के कारण शहर की अनमोल विरासत माना जाता है। आस्था और संस्कृति का यह केंद्र आज भी श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियो...
Dharohar: आई माता मंदिर के बाहर बसी है पुराने राजस्थान की विरासत, सिर्फ 10 रुपये में देखें जीवंत झलक
जोधपुर के बिलाड़ा स्थित आई माता मंदिर के बाहर बना विरासत स्थल राजस्थान के पारंपरिक ग्रामीण जीवन को सहेजे हुए है, जहां 10 रुपये का सिक्का डालते ही पुरानी व्यवस्थाएं जीवंत हो उठती हैं।
हर दिशा से उतरती सीढ़ियां और जल बचाने की अनोखी तकनीक: यही है चोपड़ा बावड़ी का असली रहस्य
धौलपुर की ऐतिहासिक चोपड़ा बावड़ी अपनी चारों दिशाओं से उतरती सीढ़ियों और प्राचीन जल संरक्षण तकनीक के कारण आज भी सबको हैरान करती है। यह राजस्थान की समृद्ध स्थापत्य विरासत का अनूठा उदाहरण मानी जाती है।