उपनाम: खरीफ सीजन
खरीफ सीजन में किसानों के लिए वरदान बना पावर वीडर, 8 से 10 मजदूरों का काम अब कुछ ही घंटों में
बालोद के गांधी किसान मॉल में उपलब्ध पावर वीडर मशीन धान और सब्जी की खेती करने वाले किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो रही है, जिससे समय और लागत दोनों की बचत हो रही है।
धान की पौध का पीलापन फसल को कर सकता है बर्बाद, जानिए 72 घंटे में इसे फिर से हरा-भरा करने का वैज्ञानिक तरीका
खरीफ सीजन में धान की नर्सरी का अचानक पीला पड़ना किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है, लेकिन विशेषज्ञ इसके लिए बेहद आसान और त्वरित समाधान लेकर आए हैं।
खरीफ सीजन में बंपर कमाई का तरीका, सब्जी लगाने से पहले मिट्टी की जांच कराना है जरूरी
मॉनसून के आगमन के साथ ही किसान सब्जियों की बुवाई की तैयारी शुरू कर देते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बंपर पैदावार और अधिक मुनाफा पाने के लिए खेती से पहले मिट्टी का परीक्षण करवाना सबसे सही विकल्प है।
धान की बंपर पैदावार के लिए अपनाएं यह खास तरीका, नर्सरी लगाने से पहले खेत की तैयारी ऐसे करें
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में धान की खेती की तैयारी कर रहे किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक तरीके बताए हैं। सही जुताई और समतलीकरण से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि लागत में भी कमी आती है।
किसानों के लिए खुशखबरी: होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंचे खाद के 4 बड़े जहाज
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर है, क्योंकि यूरिया और डीएपी से लदे चार मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट से निकल चुके हैं और अब भारतीय तटों की ओर बढ़ रहे हैं।
महंगी यूरिया-डीएपी से मिलेगी राहत, धान बोने से पहले अपनाएं यह प्राकृतिक उपाय, और उपजाऊ होगी खेत की मिट्टी
धान की खेती में यूरिया और डीएपी की बढ़ती कीमत व किल्लत से जूझ रहे किसानों को कृषि वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक खेती और हरी खाद का सुझाव दिया है, जिससे लागत घटती है और पैदावार बेहतर होती है।
अब घर बैठे एक क्लिक पर होगा किसानों का काम, दफ्तरों के चक्कर से मिलेगी राहत
मध्य प्रदेश में किसानों की सहूलियत के लिए एमपी किसान ऐप 2 शुरू किया गया है, जिसके जरिए बी-वन खसरा, पीएम किसान, गिरदावरी और सब्सिडी जैसे कई काम घर बैठे ऑनलाइन निपटाए जा सकते हैं।
तेज आंधी में भी नहीं गिरेगा पौधा! किसानों की पसंदीदा यह दमदार धान किस्म, बंपर पैदावार के लिए जानी जाती है
साल 2021 में रिलीज हुई विक्रम TCR धान की उन्नत किस्म कम ऊंचाई और मजबूत बनावट के कारण आंधी-बारिश में गिरती नहीं और बेहतर उत्पादन देती है। छत्तीसगढ़ के किसानों के बीच यह आज भी पहली पसंद बनी हुई है।
सोयाबीन की बुआई में न करें ये गलती, वरना चौपट हो सकती है फसल; जानें खाद डालने का सही तरीका
खरगोन जिले में खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन की बुआई जोरों पर है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बीज और उर्वरक एक साथ डालने से बचने और वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी है।
मूंग-उड़द बोने से पहले बीजोपचार न भूलें, वरना 60% तक गिर सकता है उत्पादन; जानें वैज्ञानिक की सलाह
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की मूंग-उड़द की बुआई से पहले कृषि विज्ञान केंद्र बालोद की पौध रोग विशेषज्ञ डॉ. भूमेश्वरी साहू ने इमिडाक्लोप्रिड से बीजोपचार की सलाह दी है, जिससे पीला मोजेक रोग और सफेद मक्खी से बचाव होता है।
खेत में जमा रहता है ज्यादा पानी? धान की यह किस्म बचाएगी फसल, जानें एक्सपर्ट की राय
छत्तीसगढ़ के जलभराव वाले निचले इलाकों के लिए कृषि विशेषज्ञ ए. आर. गौर ने किसानों को जलडुबी धान किस्म लगाने की सलाह दी है, जो अधिक पानी में भी अच्छी बढ़वार के साथ 150 से 155 दिनों में तैयार होकर 20-25 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन देती है।
बारिश कम हुई तो किसान क्या उगाएं? वैज्ञानिक ने सुझाईं 90 दिन में पकने वाली फसलें
कम बारिश की आशंका को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक किसानों को लंबी अवधि वाली धान की जगह कम समय में तैयार होने वाली सोयाबीन और अरहर जैसी फसलें अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
एक एकड़ में 400 क्विंटल तक मिर्च! बेड और ड्रिप मल्चिंग की यह तकनीक बदल सकती है किसानों की किस्मत
मिर्च की खेती में बेड बनाकर ड्रिप मल्चिंग की तकनीक अपनाने पर एक एकड़ में उत्पादन बढ़ता है और किसान सीजन में दो से चार लाख रुपये तक मुनाफा कमा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सही तैयारी और बीज की क्वालिटी से उपज 400 क्विंटल तक पहुंच सकती है।
धान की बुआई से पहले अपनाएं यह देसी तरकीब, अच्छे और खराब बीजों की हो जाएगी पहचान
खरीफ सीजन में धान की बेहतर पैदावार के लिए विशेषज्ञ ने नमक के घोल से बीज छांटने का आसान और सस्ता तरीका बताया है, जो फसल को शुरुआती बीमारियों से बचाने में मददगार हो सकता है।
खरीफ की बुवाई से पहले कराएं खेत की मिट्टी की जांच, बढ़ेगी पैदावार और कम होगा खाद का खर्च
खरीफ सीजन शुरू होने से पहले मिट्टी की जांच कराकर सही खाद और उर्वरक चुनने से न सिर्फ उत्पादन बढ़ता है, बल्कि खाद पर होने वाला खर्च भी घटता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गहरी जुताई और संतुलित पोषक तत्व मिट्टी को दोबारा उपजाऊ बनाते हैं।