AI से नहीं रहेगा इन 5 करियर को खतरा, 2030 तक बीटेक-MBA की डिग्रियों की चमक पड़ेगी फीकी करियर एक घंटा पहले 2
साल 2030 तक नौकरी बाजार का चेहरा पूरी तरह बदल जाएगा और पारंपरिक डिग्रियों की मांग घटेगी। ऐसे में जानिए वो 5 नए दौर के करियर विकल्प, जिन्हें न तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और न ही रोबोटिक्स कभी रिप्लेस कर पाएंगे।

आने वाले कुछ ही वर्षों में दुनिया भर का जॉब मार्केट पूरी तरह बदल जाने वाला है। अगर आप आज भी अपने बच्चे को सिर्फ पुरानी डिग्रियों या कोडिंग और इंजीनियरिंग के सहारे डॉक्टर-इंजीनियर बनाने का सपना देख रहे हैं, तो थोड़ा संभल जाइए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स जिस रफ्तार से अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, उसने कई परंपरागत नौकरियों के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारों का मानना है कि साल 2030 तक रट-रटकर हासिल की गई डिग्रियां महज कागज का टुकड़ा बनकर रह जाएंगी। भविष्य के डिजिटल और मशीनी युग में बाजी वही मारेगा, जिसके पास कुछ हटकर और 'आउट ऑफ द बॉक्स' सोचने वाला हुनर होगा। टेक कंपनियां अब बड़े कॉलेजों के नाम के बजाय ऐसे प्रोफेशनल्स को मनचाही सैलरी देने को तैयार हैं, जिन्हें मशीनें कभी रिप्लेस नहीं कर सकतीं।

एआई के दौर में भी सुरक्षित रहेंगी ये नौकरियां

एआई के इस दौर में सही करियर का चुनाव कर पाना आसान नहीं है। जो क्षेत्र कभी सबसे बेहतर माने जाते थे, आज उनमें नौकरी ढूंढे नहीं मिल रही। अगर आप अभी स्कूल या कॉलेज में हैं और 2030 तक नौकरी करने की योजना बना रहे हैं, तो उन्हीं क्षेत्रों की ओर रुख कीजिए जो एआई और रोबोटिक्स के दौर में भी अपनी जगह बनाए रख सकें। आइए जानते हैं ऐसे 5 दमदार न्यू-एज करियर विकल्पों के बारे में, जिनमें सैलरी शानदार होगी और नौकरी जाने का जोखिम भी कम रहेगा।

1. प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और एआई एथिक्स

भले ही एआई अब खुद कोड लिखने लगा हो, लेकिन उसी एआई को सटीक निर्देश (Prompt) देकर मनचाहा काम कैसे निकलवाया जाए, यह आज का सबसे बड़ा और सबसे महंगा करियर बन चुका है। साथ ही यह तय करने के लिए कि एआई क्या सही कर रहा है और क्या गलत तथा समाज पर इसका क्या असर पड़ रहा है, 'एआई एथिक्स एक्सपर्ट्स' की मांग तेजी से बढ़ रही है। यानी अब कोड रटना नहीं, बल्कि कंप्यूटर से अपनी भाषा में काम करवा लेना ही सबसे बड़ी खूबी मानी जाएगी।

2. ह्यूमन-सेंट्रिक डिजाइन और UX/UI

मशीनें डेटा और कोड के दम पर किसी वेबसाइट या मोबाइल ऐप का बेहतरीन लेआउट तो बना सकती हैं, लेकिन एक आम इंसान उसे इस्तेमाल करते वक्त कैसा महसूस करेगा (User Experience), इसे केवल कोई इंसान ही समझ सकता है। ह्यूमन साइकोलॉजी और डिजाइनिंग के मेल वाले इस क्षेत्र में अच्छी सैलरी वाली नौकरियों की भरमार आने वाली है, क्योंकि डिजिटल दुनिया में वही चीज बिकती है जो दिखती भी है और दिल को छू भी जाती है।

3. डेटा फॉरेंसिक और साइबर लॉयर्स

इंटरनेट और एआई का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे डीपफेक, ऑनलाइन फ्रॉड, डेटा चोरी और फर्जी खबरों का जाल भी गहराता जा रहा है। आने वाले समय में सबसे ज्यादा मारामारी 'डेटा फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स' और 'साइबर वकीलों' की रहेगी। ये वही लोग होंगे जो यह साबित करेंगे कि इंटरनेट की आभासी दुनिया में क्या असली है और क्या नकली। इस क्षेत्र में सुरक्षा और कमाई, दोनों लंबे समय के लिए तय हैं। दरअसल ये आज के दौर के डिजिटल फैक्ट चेकर्स साबित होंगे।

4. बायो-टेक और जेनेटिक काउंसिलिंग

मेडिकल साइंस अब सिर्फ पारंपरिक इलाज तक सीमित नहीं रह गया है। बायोलॉजी और डेटा साइंस के मेल से 'बायो-इन्फॉर्मेटिक्स' और 'जेनेटिक काउंसिलिंग' जैसे क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं। यहां विशेषज्ञ इंसानी जीन (Genes) और डीएनए (DNA) को समझकर किसी बीमारी के होने से पहले ही उसका इलाज खोज लेते हैं। हेल्थकेयर का यह उन्नत रूप आने वाले समय में दुनिया के सबसे अमीर स्टार्टअप्स और नौकरियों को जन्म देने वाला है।

5. मेंटल हेल्थ और कॉर्पोरेट वेलनेस कोच

यह एक ऐसा कड़वा सच है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता कि तकनीक जितनी बढ़ेगी, इंसानी अकेलापन, तनाव और डिप्रेशन भी उतनी ही तेजी से बढ़ेगा। रोबोट किसी का अकेलापन कभी दूर नहीं कर सकते। भविष्य में हर बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी अपने कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उन्हें मानसिक रूप से दुरुस्त रखने के लिए 'वेलनेस कोच' और 'मेंटल हेल्थ थेरेपिस्ट' को लाखों-करोड़ों के पैकेज पर हायर करेगी। यह पूरी तरह एआई-प्रूफ करियर माना जा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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