जून में भी संभव है मगही पान की खेती, वैज्ञानिक ने बताया बेहतर उत्पादन का तरीका बिहार एक घंटा पहले 2
मगही पान लगाने का आदर्श समय अप्रैल और मई है, लेकिन वैज्ञानिक के अनुसार जरूरी सावधानियों के साथ जून में भी इसकी खेती की जा सकती है। बेल और अतरे का सही उपचार रोगों से बचाव और अच्छी पैदावार सुनिश्चित करता है।

मगही पान की खेती के लिए वैसे तो अप्रैल और मई सबसे उपयुक्त माने जाते हैं, लेकिन जब जून का महीना चल रहा हो तो किसानों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अब भी इसकी बुआई की जा सकती है। इसका जवाब है—हां, बशर्ते किसान खेती के दौरान कुछ अहम बातों का ध्यान रखें।

बिहार में मगही पान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। नालंदा, औरंगाबाद और गया जिले इस फसल के लिए खासतौर पर प्रसिद्ध हैं। पान की खेती के लिए अप्रैल और मई का समय सबसे अनुकूल होता है, फिर भी जून में भी इसे लगाया जा सकता है, बशर्ते कुछ जरूरी सावधानियां बरती जाएं। इसी विषय पर सही जानकारी जुटाने के लिए इस्लामपुर स्थित मगही पान अनुसंधान केंद्र में वरीय वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार से बातचीत की गई, जिन्होंने पान की खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।

मगही पान लगाने का सही तरीका

डॉ. प्रभात कुमार के अनुसार, मगही पान लगाने का सबसे उपयुक्त समय अप्रैल और मई है। यदि किसी वजह से किसान इस अवधि में बुआई नहीं कर पाते, तो जून में भी पान की खेती की जा सकती है। उन्होंने बताया कि बेल लगाने से पहले उसका उपचार करना बेहद जरूरी है। किसान चाहें तो रासायनिक और जैविक दोनों ही तरीकों से बेल का उपचार कर सकते हैं। इसके साथ ही जिस अतरे यानी क्यारी में पान लगाया जाना है, उसका उपचार भी आवश्यक होता है।

ऐसे करें अतरे की तैयारी

वैज्ञानिक ने बताया कि अतरे को उपचारित करने के लिए नीम की खली या सरसों की खली का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए 100 किलो नीम या सरसों की खली में 1 किलो ट्राइकोडर्मा और 1 किलो बेसिलस पाउडर मिलाना चाहिए।

इस मिश्रण को किसी बर्तन में भरकर जूट की बोरी से ढक दें और लगभग एक सप्ताह तक रखें। इस दौरान नमी बनाए रखना जरूरी है। एक सप्ताह बाद तैयार मिश्रण का अतरे पर भुरकाव करें और इसके बाद ही पान की बेल लगाएं। इस तरीके को अपनाने से पान की खेती में मृदा जनित बीमारियों का खतरा काफी हद तक घट जाता है।

जून से अक्टूबर तक बढ़ जाता है रोगों का खतरा

डॉ. प्रभात कुमार के मुताबिक, जून से अक्टूबर के बीच पान की फसल में पदगलन, पत्ती गलन और जीवाणु पत्रलांछन जैसी बीमारियों का प्रकोप ज्यादा देखने को मिलता है। हालांकि, यदि बेल और अतरे का सही ढंग से उपचार कर लिया जाए, तो इन रोगों से काफी हद तक बचाव संभव है।

उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर पान की फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन भी बेहतर होता है। पैदावार अच्छी होने पर किसानों को अधिक मुनाफा मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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