मेवात की खास 'सीमी' के आगे नूडल्स भी फेल, बरसात के मौसम में घर-घर हो रही तैयारी जीवनशैली एक घंटा पहले 2
राजस्थान के अलवर जिले के मेवात इलाके में पारंपरिक 'सीमी' बनाने का काम तेजी पर है। गेहूं के आटे से बनी यह देसी डिश अपने लाजवाब स्वाद के लिए पूरे क्षेत्र में मशहूर है।

मेवात में सीमी का क्रेज

राजस्थान के अलवर जिले के मेवात क्षेत्र में जैसे ही बरसात का मौसम दस्तक देता है, वहां के घरों में एक विशेष परंपरा की रौनक बढ़ जाती है। स्थानीय लोग इस दौरान पारंपरिक रूप से तैयार होने वाली सेवइयों को 'सीमी' कहते हैं। त्योहारों और बारिश के दिनों में इसे बनाने का काम पूरे उत्साह के साथ किया जाता है।

कैसे तैयार होती है सीमी

सीमी को बनाने की प्रक्रिया काफी दिलचस्प है। महिलाएं शुद्ध गेहूं के आटे का इस्तेमाल करती हैं। इस प्रक्रिया के बारे में मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • गेहूं के आटे को गूंथकर एक विशेष मशीन में डाला जाता है।
  • मशीन के जरिए ताजी और लंबी सेवइयां निकाली जाती हैं।
  • इन गीली सेवइयों को रस्सी या धागों पर फैलाकर तेज धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है।
  • पूरी तरह सूखने के बाद इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए घरों में सुरक्षित रख लिया जाता है।

क्यों है इतनी खास

मेवात की यह देसी सीमी अपने बेहतरीन स्वाद के लिए पहचानी जाती है। इसे बनाने का तरीका इतना बहुमुखी है कि लोग अपनी पसंद के हिसाब से इसका आनंद लेते हैं। आप इसे मीठा बनाकर खा सकते हैं, इसे नमकीन का तड़का दे सकते हैं या फिर दूध में पकाकर इसका सेवन कर सकते हैं। आज के दौर में भी ग्रामीण संस्कृति के इस हिस्से को लोग पूरी शिद्दत से संजोए हुए हैं। बाहर के नूडल्स या अन्य फास्ट फूड के सामने भी सीमी का स्वाद लोगों को अधिक भाता है और यह घर-घर में बड़े चाव से बनाई और खाई जाती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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