रायपुर में ₹20 के नाश्ते का कमाल, कोरोना की मार झेलने के बाद नारायण स्वामी ने खड़ी की सफलता की इबारत
छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
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मेहनत और स्वाद ने बदली किस्मत
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सफलता की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते। कोतवाली चौक के नजदीक स्थित स्वामी अन्ना नाश्ता सेंटर आज शहर के सबसे मशहूर फूड स्टॉल्स में गिना जाता है। इस सेंटर के संचालक नारायण स्वामी मूल रूप से तमिलनाडु के रहने वाले हैं और करीब 10 साल पहले रोजगार की तलाश में रायपुर आए थे। उनकी यह यात्रा संघर्षों से भरी रही है, लेकिन उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और स्वाद के दम पर अपनी एक अलग पहचान बना ली है।
कोरोना का संकट और नया आगाज़
नारायण स्वामी ने शुरुआत में टिफिन सेंटर के जरिए अपना कारोबार शुरू किया था। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन वैश्विक कोरोना महामारी के दौरान उनका पूरा व्यापार अचानक ठप हो गया। इस कठिन समय में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा और स्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई थीं। हालांकि, नारायण स्वामी ने हिम्मत नहीं हारी और हार मानने के बजाय अपने पारंपरिक साउथ इंडियन व्यंजनों पर भरोसा जताया। उन्होंने नई ऊर्जा के साथ फिर से काम शुरू किया और आज उनका यह नाश्ता सेंटर शहर के लोगों की पहली पसंद बन गया है।
स्वादिष्ट व्यंजनों की लंबी फेहरिस्त
उनके नाश्ता सेंटर पर मिलने वाले सांभर वड़ा, इडली, डोसा और चना दाल वड़ा की भारी मांग रहती है। ग्राहकों की भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के दूर-दराज के इलाकों से लोग सिर्फ उनके हाथों से बने दक्षिण भारतीय व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए सुबह-सुबह यहाँ पहुँच जाते हैं। नारायण स्वामी बताते हैं कि सांभर वड़ा और इडली उनके मेन्यू के सबसे लोकप्रिय आइटम हैं, जिन्हें ग्राहक बेहद पसंद करते हैं।
सांभर बनाने का खास और सेहतमंद तरीका
नारायण स्वामी अपने सांभर की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हैं। वे बताते हैं कि उनके सांभर की सबसे बड़ी खासियत इसकी पौष्टिकता है। सामान्य तौर पर बनने वाले सांभर से यह काफी अलग और स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसे बनाने के लिए वे लौकी, भांटा यानी बैंगन, कुम्हड़ा और राहड़ दाल का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। सब्जियों और दालों के इस खास मिश्रण से सांभर को जो अनूठा स्वाद मिलता है, वही ग्राहकों को बार-बार यहां खींच लाता है। लोग न केवल स्वाद के लिए, बल्कि सेहत के लिहाज से भी उनके नाश्ते को प्राथमिकता देते हैं।
किफायती दाम और समय
ग्राहकों की सुविधा और जेब का ख्याल रखते हुए उन्होंने अपने नाश्ते की कीमत बेहद कम रखी है। नारायण स्वामी के मुताबिक, उनके यहां नाश्ते की एक प्लेट की शुरुआत मात्र 20 रुपये से होती है। इस किफायती दाम के कारण समाज के हर वर्ग के लोग ताजा और गरमा-गरम दक्षिण भारतीय नाश्ते का आनंद ले सकते हैं। उनका नाश्ता सेंटर रोजाना सुबह 6:30 बजे से शुरू हो जाता है और दोपहर 12 बजे तक खुला रहता है।
सफलता के नए आयाम
आज स्थिति यह है कि ग्राहकों के बढ़ते विश्वास के साथ उनकी कमाई में भी इजाफा हुआ है। एक समय जो व्यापार पूरी तरह ठप हो गया था, आज उसी से वे रोजाना लगभग 5000 रुपये तक की कमाई कर रहे हैं। नारायण स्वामी की यह कहानी साबित करती है कि यदि आप अपने काम और गुणवत्ता पर अटूट भरोसा रखते हैं, तो किसी भी मुश्किल दौर से निकलकर सफलता हासिल की जा सकती है।
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