चेडाबार का 'चंदन बगान': प्राकृतिक आम से हर सीजन लाखों की कमाई, दिल्ली-भोपाल तक पहुंच रहा स्वाद झारखंड एक घंटा पहले 2
पलामू के चेडाबार गांव में 15 साल पहले लगाया गया 'चंदन बगान' रसायनमुक्त, प्राकृतिक रूप से पके आमों के लिए मशहूर है और किसान को हर सीजन में लाखों रुपये की आमदनी कराता है। यहां के आमों की मांग दिल्ली और भोपाल जैसे बड़े शहरों तक है।

गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाजारों में आम की मांग तेजी से बढ़ जाती है और लोग अपनी पसंद की किस्में खरीदने के लिए बाजार का रुख करने लगते हैं। ऐसे समय में पलामू जिले के बागानों में भी आम की भरपूर बहार देखने को मिल रही है। यहां की खास बात यह है कि स्थानीय बाजार तक सीमित रहने के बजाय इन आमों का स्वाद दिल्ली और भोपाल समेत कई बड़े शहरों तक पहुंच रहा है।

इसी कड़ी में पलामू के चैनपुर प्रखंड स्थित चेडाबार गांव का 'चंदन बगान' इन दिनों आम प्रेमियों के बीच खूब चर्चा बटोर रहा है। यहां प्राकृतिक तरीके से तैयार होने वाले रसायनमुक्त आम लोगों को खासा आकर्षित कर रहे हैं। इन आमों की मांग इतनी अधिक है कि अब बागान से आम निकलने भी शुरू हो गए हैं।

प्राकृतिक तरीके से पेड़ पर ही पकते हैं आम

चेडाबार गांव के निवासी किसान तारकेश्वर सिंह चेरो पिछले कई वर्षों से अपने बागान में आम की बागवानी कर रहे हैं। उनके बागान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां आम पकाने के लिए किसी भी प्रकार के रासायनिक पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया जाता। आम पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से पेड़ों पर ही पकते हैं, जिससे उनका स्वाद और गुणवत्ता दोनों बरकरार रहते हैं।

तारकेश्वर बताते हैं कि उनके बागान के आम का स्वाद एक बार चख लेने वाला ग्राहक बार-बार यहां लौटकर आता है। प्राकृतिक मिठास और भीनी खुशबू के कारण इन आमों की मांग लगातार बढ़ रही है।

15 साल पहले लगाया गया था बगीचा

करीब 15 वर्ष पहले लगाए गए इस बागान में आज 6 एकड़ जमीन पर 365 आम के पेड़ लहलहा रहे हैं। यहां दूधिया लंगड़ा, आम्रपाली, मल्लिका और लंगड़ा समेत कई उन्नत किस्मों के आम मौजूद हैं। अलग-अलग प्रजातियां होने के कारण ग्राहकों को अपनी पसंद के अनुसार आम चुनने का मौका मिल जाता है। यही वजह है कि आम का सीजन शुरू होते ही बागान में खरीदारों की भीड़ जुटने लगती है।

इस तरह पड़ा 'चंदन बगान' नाम

तारकेश्वर सिंह चेरो बताते हैं कि इस बागान का नाम 'चंदन बगान' उनके पूर्वज चंदन सिंह के नाम पर रखा गया है। यह बागान पूर्वजों की याद को जीवित रखने के साथ-साथ आज उनकी अपनी पहचान भी बन चुका है। प्राकृतिक खेती और बेहतर उत्पादन के कारण यह बागान पूरे पलामू क्षेत्र में मशहूर हो गया है।

हर सीजन में लाखों की आमदनी

आर्थिक दृष्टि से भी यह बागान किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। तारकेश्वर के अनुसार, प्रतिदिन 1 से डेढ़ क्विंटल आम की बिक्री हो रही है और आम करीब 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। कई दिनों में तो बिक्री 3 से 4 क्विंटल तक पहुंच जाती है। इस तरह आम की खेती से उन्हें हर सीजन में लाखों रुपये की आमदनी हो जाती है।

उनकी यह सफलता साबित करती है कि अगर किसान वैज्ञानिक और प्राकृतिक तरीके से बागवानी करें, तो खेती को मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है। चंदन बगान आज न केवल अपने स्वादिष्ट आमों के लिए, बल्कि पलामू में सफल बागवानी के बेहतरीन उदाहरण के रूप में भी पहचाना जाने लगा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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