पश्चिम बंगाल
4 दिन पहले
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पश्चिम बंगाल की सियासत इन दिनों उबाल पर है। विधानसभा चुनावों में मिली बड़ी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर सांसदों और विधायकों की नाराजगी अब खुलकर सतह पर आ गई है। इसी असंतोष ने पार्टी में विद्रोह की चिंगारी को हवा दे दी है। ममता बनर्जी की चार दशक पुरानी सहयोगी और टीएमसी सांसद काकोली घोष ने पूर्व क्रिकेटर एवं सांसद यूसुफ पठान समेत कई सांसदों को लेकर बड़ा खुलासा किया है।
20 सांसदों के विद्रोह का दावा
67 वर्षीय वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने सोमवार को बताया कि पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद यूसुफ पठान सहित 20 सांसद अब पार्टी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर चुके हैं। उनके मुताबिक ये सभी सांसद अब एनडीए के साथ खड़े हैं।
एक विशेष इंटरव्यू में काकोली ने कहा, ‘हम 20 सांसद हैं। मैं एक-एक का नाम ले सकती हूं, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं करना चाहती।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसुफ पठान भी उन्हीं सांसदों में शामिल हैं जो विद्रोही खेमे के साथ डटे हुए हैं।
40 साल का साथ अब संकट में
काकोली घोष दस्तिदार बीते 40 साल से ममता बनर्जी की सहयोगी रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं 1976 से ममता दीदी के साथ जुड़ी हूं। इस उम्र में मुझे यह कतई उम्मीद नहीं थी कि पार्टी इस हाल तक पहुंच जाएगी।”
आरजी कर रेप-मर्डर मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने नाराजगी जताई, “एक पार्टी कार्यकर्ता ने सबूत मिटा दिए, इसके बावजूद उसे बचाया जा रहा है। दुनिया में ऐसा जघन्य अपराध शायद ही कभी हुआ हो।” उन्होंने आगे कहा, “पार्टी में विकास नहीं है, उद्योग नहीं आ रहे, शिक्षा, फिल्म इंडस्ट्री, नगरपालिका भर्तियां—सब कुछ गड़बड़ हो चुका है। पिछले 3-4 साल से हम सब यह देख रहे थे, लेकिन सुधार का कोई मौका नहीं मिला।”
जनता के फैसले के साथ खड़े होने का दावा
विधानसभा चुनाव के नतीजों पर उन्होंने कहा कि लोगों के फैसले का पूरा सम्मान है। उन्होंने कहा, “बंगाल की जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। मैं जनता के साथ हूं। मेरे साथ 19 अन्य सांसदों ने इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं।”
आखिर क्यों भड़का विद्रोह?
इतने वर्षों तक पार्टी को देने के बाद बगावत पर उतरे नेताओं को लेकर उठ रहे सवालों पर काकोली घोष ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर यह पूछा जा रहा है कि लंबे समय से ममता के साथ रहे लोग आखिर विद्रोह क्यों कर रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा, “जो लोग सोशल मीडिया पर विदेश से ट्वीट कर मुझे निशाना बना रहे हैं, वे तब पैदा भी नहीं हुए थे जब मैं राजनीति में आई थी। मेरे परिवार में सात सांसद और राज्यसभा सदस्य रहे हैं। मेरे मामा और जेठू मंत्री रह चुके हैं। मेरा चाचा स्वतंत्रता सेनानी था। ताकत और ईमानदारी दो अलग-अलग चीजें हैं।”
घोष ने आगे कहा, ‘आज कई लोग टीएमसी में बड़े नेता होने का दावा करते हैं, लेकिन जब ममता बनर्जी ने अपना राजनीतिक संघर्ष शुरू किया था, तब वे पार्टी के साथ नहीं थे।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति में सिर्फ पद ही नहीं, बल्कि ईमानदारी और सिद्धांत भी उतने ही अहम होते हैं।
काकोली घोष का कहना है कि यह विद्रोह किसी निजी महत्वाकांक्षा से नहीं, बल्कि बंगाल की जनता की आवाज के साथ खड़े होने के फैसले से जुड़ा है। ऐसे में टीएमसी की यह बगावत अब बड़े स्तर पर पहुंच चुकी है। अब देखना यह होगा कि यह विद्रोह पार्टी को तोड़ देगा या ममता बनर्जी इसे संभाल ले जाएंगी।
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