खेती में ग्राफ्टिंग विधि क्या है? जिससे दो पौधे बन जाते हैं एक, किसानों के लिए वरदान बन रही नई तकनीक उत्तराखंड 2 घंटे पहले 2
ग्राफ्टिंग एक ऐसी बागवानी तकनीक है जिसमें दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को जोड़कर एक नया और मजबूत पौधा तैयार किया जाता है। यह पौधों को जल्दी फल देने, बेहतर गुणवत्ता और अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता देने में मदद करती है।

बागवानी और गार्डनिंग में रुचि रखने वाले लोग अक्सर चाहते हैं कि उनके पौधे तेजी से बढ़ें, स्वस्थ रहें और अच्छी गुणवत्ता वाले फल-फूल दें। इसी चाहत को पूरा करने में ग्राफ्टिंग तकनीक बेहद उपयोगी साबित होती है। यह तरीका कोई नया नहीं है, फिर भी आज बहुत से लोग इसके असली लाभों से अनजान हैं। यही वजह है कि अनुभवी माली और किसान वर्षों से इस तकनीक का इस्तेमाल करते आ रहे हैं।

ग्राफ्टिंग दरअसल एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दो भिन्न पौधों के हिस्सों को इस ढंग से जोड़ा जाता है कि वे आपस में मिलकर एक नया और मजबूत पौधा बन जाएं।

रूटस्टॉक और सायन क्या होते हैं?

गार्डनर नरेश ने बातचीत के दौरान बताया कि ग्राफ्टिंग में सामान्यतः एक पौधे की जड़ और तने के निचले हिस्से का उपयोग किया जाता है, जिसे रूटस्टॉक कहते हैं। वहीं दूसरे पौधे की शाखा या कलम को सायन कहा जाता है। जब इन दोनों को सही तरीके से आपस में जोड़ा जाता है, तो तैयार पौधा दोनों की खूबियों को अपने भीतर समेट लेता है। इसी कारण ग्राफ्टिंग को बागवानी की सबसे प्रभावी तकनीकों में गिना जाता है।

जल्दी फल देने लगते हैं पौधे

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पौधे सामान्य पौधों की तुलना में जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं। कई फलदार पौधों को बीज से तैयार करने पर फल आने में कई साल लग सकते हैं, जबकि ग्राफ्टिंग से तैयार पौधे कम समय में ही उत्पादन देने लगते हैं।

बढ़ती है पौधों की उम्र और गुणवत्ता

ग्राफ्टिंग का एक अन्य अहम फायदा पौधों की गुणवत्ता में सुधार है। इसके माध्यम से ऐसे पौधे तैयार किए जा सकते हैं जिनमें स्वाद, आकार और उत्पादन क्षमता बेहतर हो। आम, अमरूद, नींबू, संतरा और गुलाब जैसे पौधों में यह तकनीक खासी लोकप्रिय है। कई बार दुर्लभ या विशेष किस्म के पौधों को सुरक्षित बनाए रखने के लिए भी ग्राफ्टिंग का सहारा लिया जाता है।

इसके अतिरिक्त यह तकनीक पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है। यदि किसी मजबूत और रोगों से लड़ने वाले रूटस्टॉक पर अच्छी गुणवत्ता वाली शाखा जोड़ी जाए, तो तैयार पौधा बीमारियों और कीटों का बेहतर सामना कर पाता है। इससे पौधों के खराब होने की आशंका कम होती है और उनकी आयु भी बढ़ जाती है।

किसानों के लिए नई क्रांति

बदलते मौसम और जलवायु की चुनौतियों के बीच ग्राफ्टिंग का महत्व और अधिक बढ़ गया है। अक्सर पौधे अत्यधिक गर्मी, ठंड या मिट्टी की खराब गुणवत्ता की वजह से प्रभावित हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में मजबूत रूटस्टॉक का उपयोग कर पौधों को कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर ढंग से विकसित किया जा सकता है। यही कारण है कि आधुनिक खेती और बागवानी में इस तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है।

घर के छोटे किचन गार्डन से लेकर बड़े बागानों तक, ग्राफ्टिंग ने पौधों की दुनिया में एक नई क्रांति ला दी है। यह न सिर्फ बेहतर उत्पादन का रास्ता खोलती है, बल्कि पौधों को अधिक मजबूत, स्वस्थ और टिकाऊ भी बनाती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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