कैंची धाम स्थापना दिवस मेला: निजी वाहनों पर रोक, जानिए शटल सेवा और पूरा ट्रैफिक प्लान उत्तराखंड 2 महीने पहले 54
उत्तराखंड के कैंची धाम में 15 जून को स्थापना दिवस का मेला आयोजित होगा, जिसके लिए नैनीताल पुलिस ने विशेष यातायात और सुरक्षा इंतजाम किए हैं। इस बार श्रद्धालु निजी वाहन से सीधे मंदिर तक नहीं जा सकेंगे और इसके लिए करीब 350 बसों की शटल व्यवस्था की गई है।

उत्तराखंड में बाबा नीम करौली के प्रसिद्ध कैंची धाम में 15 जून को स्थापना दिवस का भव्य मेला आयोजित होने जा रहा है। इस अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए नैनीताल पुलिस ने खास तैयारियां की हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष यातायात तथा सुरक्षा योजना लागू की गई है।

निजी वाहनों के प्रवेश पर रहेगी रोक

इस बार श्रद्धालुओं को अपने निजी वाहन से सीधे कैंची धाम मंदिर तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मेले वाले मार्ग पर निजी एवं सामान्य यात्री वाहनों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, ताकि रास्ते में जाम की स्थिति न बने और दर्शन की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से चल सके।

शटल सेवा के लिए 350 बसें तैनात

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने शटल बस सेवा का इंतजाम किया है। मेला ड्यूटी में करीब 350 बसें तैनात रहेंगी, जो भक्तों को निर्धारित स्थानों से मंदिर तक पहुंचाने का काम करेंगी। इन सभी बसों को 14 जून से तय किए गए शटल प्वाइंट पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।

सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध

मेले के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई एजेंसियों की टीमें मौके पर मौजूद रहेंगी। इनमें पीएसी, एसएसबी, एसडीआरएफ, एटीएस, बम निरोधक दस्ता और अग्निशमन विभाग की टीमें शामिल हैं, जो लगातार निगरानी रखेंगी।

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह

कैंची धाम जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन की ओर से तय की गई शटल व्यवस्था का ही उपयोग करें और निर्धारित शटल प्वाइंट से बसों के जरिए मंदिर तक पहुंचें। इससे न केवल यात्रा सुगम रहेगी, बल्कि दर्शन की प्रक्रिया भी सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनी रहेगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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