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2 घंटे पहले
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विचारों
पूर्वी चीन की एक महिला पूरे 22 साल के बाद अपने जन्म देने वाले परिवार से दोबारा मिली है। बचपन में वह सिर्फ इसलिए घर छोड़कर भाग गई थी, क्योंकि उससे गलती से शावर जेल की एक कांच की बोतल टूट गई थी और उसे डर था कि उसकी मां उसे डांटेंगी या मारेंगी। चीन के मीडिया आउटलेट शिचेंग मीडिया के मुताबिक, जियांग्शी प्रांत के गांझोउ की रहने वाली लियू शियू होंग उस वक्त महज 9 साल की थीं।
उनके माता-पिता मजदूरी के सिलसिले में गुआंग्डोंग प्रांत के जिएयांग शहर में रहते थे और पूरा परिवार एक छोटे से किराए के कमरे में गुजर-बसर करता था।
खेलते-खेलते टूट गई बोतल
साल 2004 की बात है, जब लियू अपने एक दोस्त के घर खेल रही थीं। इसी दौरान उनके हाथों करीब 10 युआन यानी लगभग 55 रुपये कीमत वाली शावर जेल की कांच की बोतल टूट गई। उस समय परिवार की आर्थिक हालत कमजोर थी, इसलिए यह रकम उनके लिए बहुत मायने रखती थी।
डांट और सजा के डर से लियू घर लौटने के बजाय वहां से भाग निकलीं। रास्ता भटकते हुए वह एक सब्जी मंडी तक पहुंच गईं। वहीं उनकी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई, जिसने बाद में उन्हें गोद ले लिया। इस व्यक्ति की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है।
दिनों तक तलाशते रहे असली माता-पिता
लियू के असली माता-पिता ने उन्हें ढूंढने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने तीन दिनों तक वहां के टीवी चैनल के जरिए लोगों से मदद की गुहार लगाई, मगर बेटी का कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
रिपोर्टों के अनुसार, गुआंग्डोंग में जिस परिवार ने उन्हें गोद लिया, उसने उनकी अच्छी परवरिश की। बाद में उसी परिवार ने लियू को उनके असली माता-पिता तक पहुंचने में भी मदद की। स्वयंसेवकों और पुलिस की मदद से अब 31 साल की लियू हाल ही में अपने परिवार तक पहुंचने में कामयाब रहीं।
स्टेशन पर इंतजार, गले लगकर रोए सब
जब लियू हाई-स्पीड ट्रेन से अपने गांव पहुंचीं, तो उनके रिश्तेदार स्टेशन पर उनका इंतजार कर रहे थे। अपने भाई-बहनों से मिलते ही वह भावुक हो उठीं और सभी एक-दूसरे को गले लगाकर रो पड़े।
घर पहुंचने पर परिवार ने पटाखे, बैनर और फूलों के साथ उनका स्वागत किया। उनकी मां ने रोते हुए कहा, “बेटी, मुझे बहुत दुख है। मैं उस समय तुम्हारा ध्यान नहीं रख सकी।” लियू ने भी माफी मांगते हुए कहा कि उनके घर छोड़कर चले जाने की वजह से माता-पिता को सालों तक दुख झेलना पड़ा।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि लियू हमेशा के लिए अपने गांव लौटेंगी या नहीं। यह भी पता नहीं चल सका है कि बचपन में उन्हें अक्सर सजा दी जाती थी या नहीं।
पालन-पोषण को लेकर उठे सवाल
यह भावुक कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और कई लोगों ने पालन-पोषण के तरीकों पर चर्चा छेड़ दी। कुछ लोगों का कहना है कि छोटी-सी गलती पर सजा के डर से बच्चे का घर छोड़ देना परिवार के माहौल के बारे में बहुत कुछ बयां करता है।
वहीं कुछ लोगों ने ऐसे बच्चों की मदद के लिए बेहतर सामाजिक व्यवस्था की मांग उठाई, जो अपने परिवारों के पास लौटने से डरते हैं।
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