5 कट्ठा खेत में मिर्च की खेती से हर महीने ₹50,000 की कमाई, कोडरमा के पप्पू ने पेश की मिसाल; जानिए किस्म और तकनीक झारखंड एक घंटा पहले 2
कोडरमा के किसान पप्पू मेहता महज 5 कट्ठा जमीन पर 'अंकुर-099' किस्म की मिर्च की आधुनिक खेती कर रहे हैं। मल्चिंग और ड्रिप इरीगेशन तकनीक की मदद से उन्हें हर महीने करीब 45 से 50 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड के किसान पप्पू मेहता आज उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो खेती को कम मुनाफे वाला काम समझते हैं। कभी क्रशर मंडी में मजदूरी करके अपने परिवार का गुजारा करने वाले पप्पू ने वैज्ञानिक खेती को अपनाकर एक सफल किसान के रूप में अपनी अलग पहचान बना ली है। आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के दम पर वे अब गांव में रहते हुए ही अच्छी कमाई कर रहे हैं।

पप्पू मेहता बताते हैं कि वे मौसम के हिसाब से अलग-अलग तरह की सब्जियों की खेती करते हैं। इन दिनों उन्होंने करीब 5 कट्ठा जमीन पर 'अंकुर-099' किस्म की मिर्च लगाई है। इस फसल में उन्होंने कृषि वैज्ञानिक की सलाह पर आधुनिक खेती की तकनीकों का उपयोग किया, जिससे उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता में भी बढ़ोतरी हुई है।

3 हजार के बीज से हर महीने 45 हजार की आमदनी

पप्पू ने बताया कि मिर्च की नर्सरी और बीज पर उन्हें लगभग 3 हजार रुपये खर्च करने पड़े। मार्च के आखिरी हफ्ते में खेत तैयार कर पौधों की रोपाई की गई। करीब 70 दिनों बाद पहली तुड़ाई में लगभग 500 किलोग्राम मिर्च का उत्पादन हुआ। स्थानीय मंडी में उन्हें मिर्च की कीमत अधिकतम 45 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिली। इस तरह पहली तुड़ाई से ही उन्हें करीब 22 हजार रुपये की आय हुई।

उनका कहना है कि 15 दिनों के अंतराल पर दूसरी तुड़ाई होगी, जिसमें उत्पादन और कमाई दोनों के बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल मिर्च की खेती से उन्हें हर महीने करीब 40 से 45 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। यह उत्पादन नवंबर-दिसंबर तक लगातार मिलता रहेगा, जिससे उनकी आय में और इजाफा होगा।

मल्चिंग और ड्रिप इरीगेशन से मिला फायदा

पप्पू मेहता ने बताया कि पहले वे पारंपरिक तरीके से खेती करते थे, जिसमें मेहनत भी ज्यादा लगती थी और पानी की खपत भी अधिक होती थी। लेकिन अब उन्होंने मल्चिंग और ड्रिप इरीगेशन तकनीक को अपना लिया है। मल्चिंग से खेत में नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं, जबकि ड्रिप इरीगेशन के जरिए पानी और पोषक तत्व सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचते हैं।

इस तकनीक से पानी की बचत होती है, पौधों को एक समान पोषण मिलता है और उत्पादन बेहतर होता है। उन्होंने कहा कि अगर किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं और बाजार की मांग के अनुसार फसल का चुनाव करें, तो खेती को एक फायदेमंद कारोबार में बदला जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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