शाही वैभव से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक: आगरा के दिल्ली गेट की वो ऐतिहासिक दास्तान जो आज भी अनकही है उत्तर प्रदेश 2 महीने पहले 36
आगरा का दिल्ली गेट सिर्फ एक पुराना दरवाज़ा नहीं, बल्कि मुग़ल सल्तनत और आज़ादी की जंग की कई अनसुनी यादों का गवाह है. लाल बलुआ पत्थर से बना यह भव्य द्वार आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में खड़ा है.

ताजनगरी आगरा की पहचान दुनिया भर में भले ही ताजमहल से होती हो, लेकिन इस शहर का सीना ऐसे कई किस्सों को समेटे हुए है जो मुग़ल सल्तनत के दौर और आज़ादी की लड़ाई से जुड़े हैं. इन्हीं में से एक अनमोल धरोहर है हरिपर्वत चौराहे के नज़दीक खड़ा 'दिल्ली गेट'.

लाल बलुआ पत्थर से तराशा शाही प्रवेश द्वार

लाल बलुआ पत्थरों से बारीकी के साथ गढ़ा गया यह भव्य दरवाज़ा कभी मुग़ल बादशाहों और उनके शाही काफिलों के आने-जाने का मुख्य रास्ता हुआ करता था. अपने दौर में यह सत्ता और वैभव का प्रतीक था, जहाँ से राजसी सवारियाँ शान के साथ गुज़रती थीं.

आज भी अडिग खड़ी अभेद्य धरोहर

समय बीतने के साथ यह ऐतिहासिक दरवाज़ा आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में एक मज़बूत और अभेद्य विरासत के रूप में डटा हुआ है. सदियों का इतिहास अपने भीतर समेटे यह द्वार आज भी अपनी भव्यता बरकरार रखे हुए है.

एक गौरवशाली अतीत, जिससे लोग आज भी अनजान

शाही ठाट-बाठ से लेकर आज़ादी के संघर्ष तक, इस दरवाज़े ने कई दौर देखे हैं. इसके बावजूद आम लोगों की एक बड़ी संख्या आज भी इसके गौरवशाली अतीत और इससे जुड़ी कहानियों से अनजान है. यही वजह है कि इस धरोहर का इतिहास जानना हर उस व्यक्ति के लिए ज़रूरी है, जो आगरा की असली विरासत को समझना चाहता है.

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप