जहानाबाद की पहचान बना चनाचूर, सैदपुर गांव के 25 घरों में तैयार होता है ट्रेन का यह मशहूर नाश्ता, महिलाएं संभाल रहीं रोजगार की कमान बिहार एक घंटा पहले 3
जहानाबाद के मखदुमपुर प्रखंड स्थित सैदपुर गांव में करीब 20 से 25 घरों में चनाचूर बनाया जाता है, जो ट्रेनों और स्टेशनों पर खूब बिकता है। इस घरेलू कारोबार के जरिए गांव की महिलाएं अपने परिवार की आजीविका चला रही हैं।

ट्रेन के सफर के दौरान अलग-अलग राज्यों और स्टेशनों पर तरह-तरह की खाने-पीने की चीजें मिलती हैं। कहीं खीरा-ककड़ी बिकता है तो कहीं झालमुरी के साथ मूंगफली, चना और दूसरे खाद्य पदार्थ मिलते रहते हैं। ठीक इसी तरह जहानाबाद और इसके आसपास के स्टेशनों पर एक खास आइटम खूब बिकता है, जिसका नाम है चनाचूर। यह लगभग हर पैसेंजर ट्रेन में बिकता हुआ नजर आ जाता है। सस्ता होने के साथ-साथ इसका स्वाद लोगों को खूब भाता है, और जहानाबाद में इसके बिकने की अपनी एक अलग कहानी है।

सैदपुर गांव में घर-घर बनता है चनाचूर

चनाचूर खाने का बहुत पुराना आइटम है और अब यह कई जगहों पर पसंद किया जाने लगा है। वैसे तो बिहार में कई स्थानों पर चनाचूर तैयार किया जाता है, लेकिन जहानाबाद में एक ऐसा गांव है जहां करीब 20 से 25 घरों में इसका निर्माण होता है। यह गांव मखदुमपुर प्रखंड का सैदपुर है।

सुबह चार बजे से शुरू हो जाता है काम

यहां लगभग हर घर में सिलवटें देखने को मिल जाती हैं, जिन पर चना को कूटकर और कड़ाही में तलकर चनाचूर तैयार किया जाता है। इसे बनाने के लिए महिलाएं और पुरुष सुबह 4:00 बजे से ही जुट जाते हैं। पूरे दिन वे इसी काम में लगे रहते हैं और इससे होने वाली आमदनी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

बहनोई से मिली कारोबार की सीख

जीविका से जुड़ीं संजू देवी ने बताया कि काफी साल पहले नदौल के रहने वाले उनके बहनोई गांव आए थे। उस समय वे लंबे अरसे से चनाचूर का कारोबार कर रहे थे। उन्होंने ही गांववालों को सुझाव दिया कि वे भी घर बैठे इस तरह का व्यवसाय कर सकते हैं।

संजू देवी के मुताबिक, बहनोई ने ही लोगों को चनाचूर बनाने की बारीकियां सिखाईं और तभी से गांव में इसका सिलसिला शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि आज उनके यहां हर दिन 4 किलो से 5 किलो तक चना कूटा जाता है और उसी से चनाचूर तैयार किया जाता है। इस काम में उनके पति भी पूरा सहयोग देते हैं और बच्चे भी कभी-कभी हाथ बंटा देते हैं।

घर बैठे आमदनी, पलायन से राहत

संजू ने कहा कि इस कारोबार से घर बैठे आमदनी हो जाती है और उनके पति को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्य नहीं जाना पड़ता। दोनों मिलकर यहीं साथ काम करते हैं। वे मेला और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी चनाचूर बेचते हैं। संजू ने यह भी बताया कि ट्रेन में बिक्री के लिए पास की जरूरत होती है, जो उनके पति के पास है। इसी पास के जरिए उन्हें ट्रेन में चनाचूर बेचने की अनुमति मिलती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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