राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
2
विचारों
पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। राज्य की भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को पुख्ता करने और तुष्टिकरण की राजनीति पर पूर्ण विराम लगाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाते हुए पूरे प्रदेश में चल रहे तमाम मदरसों का राज्यव्यापी सर्वे कराने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले से राज्य के प्रशासनिक और धार्मिक दायरों में हलचल मच गई है।
इस संवेदनशील फैसले को लेकर सिलीगुड़ी पहुंचीं राज्य की कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने मीडिया से बातचीत में कई चौंकाने वाले दावे किए, जिन्होंने पिछली सरकारों की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
'राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है सर्वे'
अग्निमित्रा पॉल ने दो टूक कहा कि मदरसों का सर्वे कराना वक्त की मांग है और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद आवश्यक हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते 34 वर्षों के वामपंथी शासन और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकाल में वोट बैंक की राजनीति के चलते जानबूझकर अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया गया, जिसका खामियाजा आज पूरा बंगाल भुगत रहा है।
अवैध मदरसों में छिपते रहे आतंकी
मंत्री ने पत्रकारों के सामने एक आतंकी कनेक्शन का खुलासा करते हुए बताया कि जांच में सामने आया है कि बंगाल के अवैध मदरसे राष्ट्रविरोधी तत्वों और आतंकियों के लिए सबसे सुरक्षित पनाहगाह बन चुके थे।
आतंकी शाद अली का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, “हमने देखा है कि किस तरह शाद अली जैसे खतरनाक आतंकवादी राज्य के भीतर एक अवैध मदरसे में छिपकर शरण लिए हुए थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उस आतंकवादी ने भारत में तीन बार मतदान भी किया था। हमने खुद उसका वोटर आईडी कार्ड देखा है।”
पॉल ने सख्त लहजे में कहा कि सुवेंदु सरकार अब किसी भी कीमत पर अवैध मदरसों के जरिए पश्चिम बंगाल को आतंकियों का 'सेफ हेवन' नहीं बनने देगी। यही वजह है कि हर मदरसे का ब्योरा खंगालने के लिए यह सर्वे कराया जा रहा है, ताकि अवैध रूप से संचालित ऐसे संस्थानों को तत्काल बंद किया जा सके।
रोहिंग्या घुसपैठ पर निशाना
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि बीते कई दशकों में पश्चिम बंगाल में रोहिंग्याओं और अवैध घुसपैठियों को न सिर्फ प्रोत्साहित किया गया, बल्कि अवैध तरीके से लाकर यहां बसाया भी गया। उनके मुताबिक सरकार का यह सर्वे ऐसे घुसपैठियों की पहचान करने में भी मददगार साबित होगा।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कानूनी रूप से चल रहे वैध मदरसों के खिलाफ नहीं है, बल्कि वहां पढ़ने वाले मुस्लिम बच्चों के भविष्य को संवारना चाहती है।
आधुनिक शिक्षा का संकल्प
अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे मुस्लिम बच्चे भी विकास की उस मुख्यधारा का हिस्सा बनें, जिसे हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में आगे बढ़ा रहे हैं। जो मदरसे कानूनी रूप से सही हैं, वहां भी हम आधुनिक शिक्षा लागू करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि मुस्लिम समाज के बच्चे, चाहे लड़के हों या लड़कियां, सिर्फ पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रहें।”
उन्होंने आगे कहा कि ये बच्चे पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, वैज्ञानिक और आईएफएस अधिकारी बनें। मंत्री के अनुसार सरकार उन्हें उस टीम का हिस्सा बनाना चाहती है, जो बंगाल और भारत को दुनिया में सबसे आगे ले जाएगी।
राजनीति में नई हलचल तय
सिलीगुड़ी में दिया गया यह बयान साफ करता है कि नई भाजपा सरकार अब बंगाल के सीमावर्ती और आंतरिक इलाकों में किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। मदरसों के इस राज्यव्यापी सर्वे के जरिए सरकार एक तरफ तुष्टिकरण के पुराने ढांचे को ढहाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय में आधुनिक शिक्षा की पैरवी कर 'सबका साथ, सबका विकास' के नैरेटिव को स्थापित करना चाहती है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जैसे-जैसे इस सर्वे की रिपोर्ट सामने आएगी, बंगाल की राजनीति में नया उबाल देखने को मिलेगा।
Comments
0 comment