रोज़ाना के वर्कआउट में क्यों शामिल करें सिट-अप्स? जानिए 6 शानदार फायदे, सिर्फ एब्स नहीं इन अंगों को भी देगा मज़बूती जीवनशैली 2 दिन पहले 13
डेस्क जॉब करने वालों के लिए सिट-अप्स बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। यह सिर्फ एब्स ही नहीं, बल्कि कोर स्ट्रेंथ, पोश्चर, बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी को भी बेहतर बनाते हैं।

घंटों ऑफिस की कुर्सी पर बैठे रहने और शारीरिक गतिविधि कम होने के कारण हमारा शरीर धीरे-धीरे कई बीमारियों का अड्डा बनने लगता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, 18 से 64 साल के वयस्कों को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की मॉडरेट या 75 मिनट की हैवी एक्सरसाइज ज़रूर करनी चाहिए।

फिट रहने के लिए वैसे तो कई तरह की कसरतें मौजूद हैं, लेकिन एक बेहद बेसिक एक्सरसाइज ऐसी है जिसे अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं और वह है सिट-अप्स। अगर आप भी इसे महज़ 'एब्स' बनाने वाली कसरत मानते हैं, तो आप इसके बाकी फायदों से वाकिफ नहीं हैं। आइए जानते हैं कि सिट-अप्स को आज ही से अपने वर्कआउट रूटीन में क्यों जगह देनी चाहिए।

कोर स्ट्रेंथ को बनाता है फौलादी

सिट-अप्स का सीधा असर आपके पेट की मांसपेशियों (Rectus Abdominis) पर पड़ता है, जिससे सिक्स-पैक एब्स टोन होते हैं। मगर इसका फायदा सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं है; यह पेट की गहरी मांसपेशियों (Transverse Abdominis) और बगल की मांसपेशियों (Obliques) को भी मज़बूती देता है। एक ताकतवर कोर पूरे शरीर की ताकत बढ़ाता है, जिससे भारी सामान उठाना, दौड़ना या बच्चों के पीछे भागना काफी आसान हो जाता है।

खराब पोश्चर से दिलाता है छुटकारा

घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करने से कंधे झुकने लगते हैं और रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर पड़ता है। सिट-अप्स इस परेशानी का कारगर इलाज हैं। यह आपकी हिप्स, स्पाइन और अपर बॉडी को सही अलाइनमेंट में लाता है। जब पीठ और पेट मज़बूत होते हैं, तो शरीर सीधा रहता है, जिससे गर्दन का दर्द कम होता है और फेफड़ों तक खुलकर ऑक्सीजन पहुंचती है।

चोट लगने का खतरा करता है कम

कमज़ोर कोर के चलते अक्सर पीठ या कमर में अचानक झटका लग जाता है। सिट-अप्स करने से आपकी पेल्विस (कमर का निचला हिस्सा) और रीढ़ की हड्डी को स्थिरता मिलती है। यह मांसपेशियों के बीच बेहतरीन संतुलन बनाता है, जिससे वर्कआउट के दौरान या अचानक होने वाले मूवमेंट में चोट लगने का जोखिम काफी घट जाता है।

स्पोर्ट्स और एथलेटिक परफॉर्मेंस में सुधार

अगर आप रनिंग, साइकलिंग या हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट (HIIT) करते हैं, तो सिट-अप्स आपके लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। यह कसरत आपके शरीर को बिना डगमगाए एक जगह स्थिर रखना सिखाती है। इससे आपकी सहनशक्ति (Endurance) बढ़ती है और आप जल्दी थके बिना लंबे समय तक वर्कआउट या कोई भी खेल खेल सकते हैं।

बॉडी बैलेंस और रोज़मर्रा की ज़िंदगी बनाए आसान

सिट-अप्स आपके दिमाग और मांसपेशियों के तालमेल (Proprioception) को बेहतर बनाते हैं। जब पेट और पीठ की मांसपेशियां एक साथ काम करती हैं, तो शरीर का संतुलन शानदार हो जाता है। यह संतुलन आपको योग के कठिन आसन करने, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने या एक हाथ में भारी ग्रोसरी का थैला उठाकर भीड़ में चलने जैसे रोज़मर्रा के कामों में मदद करता है।

फ्लेक्सिबिलिटी और मोबिलिटी बढ़ाए

लगातार बैठे रहने से हमारे हिप फ्लेक्सर्स (कमर के जोड़ की मांसपेशियां) टाइट हो जाते हैं, जिससे लोअर बैक पेन शुरू हो जाता है। जब आप सिट-अप्स करते हैं, तो रीढ़ की हड्डी के झुकाव से इन मांसपेशियों में खिंचाव आता है, जिससे पेट और पीठ की जकड़न दूर होती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।

कैसे करें शुरुआत?

अगर आप बिगिनर हैं, तो हफ्ते में 3 दिन 10 से 15 सिट-अप्स के 3 सेट्स से शुरुआत करें। जैसे-जैसे आपकी ताकत बढ़ने लगे, आप इसे बढ़ाकर 20 से 30 रेप्स तक ले जा सकते हैं। याद रखें, फिटनेस का नियम यह है कि आप कितने ज्यादा सिट-अप्स कर रहे हैं, इससे ज़्यादा अहम यह है कि आप उन्हें सही फॉर्म और तरीके से कर रहे हैं या नहीं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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