वजन घटाने के चक्कर में कहीं आप भी तो नहीं खा रहे 'फेक हेल्दी फूड्स'? ये 5 सच्चाई हैरान कर देंगी जीवनशैली 3 महीने पहले 46
बाजार में बिकने वाले लो-फैट, डाइट और प्रोटीन वाले कई पैकेज्ड फूड्स देखने में हेल्दी लगते हैं, लेकिन उनमें छिपी चीनी, सोडियम और प्रिजर्वेटिव्स वजन घटाने के बजाय बढ़ा देते हैं। जानिए ऐसे ही 5 फेक हेल्दी फूड्स के बारे में।

आजकल बहुत से लोगों के सिर पर वजन घटाने की धुन सवार रहती है। वे लगातार यही सोचते रहते हैं कि कौन-सा तरीका अपनाएं जिससे कम समय में ज्यादा वजन कम हो जाए। इसके लिए कुछ लोग जिम में जाकर घंटों पसीना बहाते हैं, तो कुछ पार्क में फिजिकल एक्टिविटी करते हैं। वहीं एक बड़ा तबका ऐसा भी है जो वजन घटाने का दावा करने वाले पैकेज्ड फूड्स खरीदकर खाता है।

इन प्रोडक्ट्स पर अक्सर 'फैट फ्री', 'जीरो कैलोरी' और 'डाइट' जैसी बातें लिखी होती हैं, जिन्हें देखकर लोगों को लगता है कि उन्हें वजन घटाने का शॉर्टकट मिल गया है। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इनमें से ज्यादातर असल में फेक हेल्दी फूड्स हैं। ये चीजें वेट लॉस के नाम पर न सिर्फ वजन बढ़ाती हैं, बल्कि जेब भी ढीली करती हैं।

फेक वेट लॉस फूड्स से बचना क्यों जरूरी है

कई कंपनियां दावा करती हैं कि उनके तैयार किए गए फूड्स वजन घटाने में मदद करते हैं। इसी चक्कर में लोग लो-फैट, डाइट या प्रोटीन बार जैसे पैकेज्ड फूड्स को हेल्दी मानकर खाने लगते हैं। हकीकत यह है कि इनमें चीनी, सोडियम और प्रिजर्वेटिव्स छिपे होते हैं, जिनकी वजह से वजन घटने के बजाय बढ़ने लगता है। ऐसे में सफल वेट लॉस के लिए इन फूड्स से दूरी बनाना जरूरी है।

रेडी-टू-ईट ओट्स और कॉर्नफ्लेक्स

ओट्स को सेहत के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन जब आप बाजार से मसाला ओट्स या स्ट्रॉबेरी और चॉकलेट फ्लेवर वाले इंस्टेंट ओट्स खरीदते हैं, तो दरअसल आप मार्केटिंग के जाल में फंस जाते हैं। सच्चाई यह है कि फ्लेवर्ड ओट्स और कॉर्नफ्लेक्स में स्वाद बढ़ाने के लिए ज्यादा मात्रा में सोडियम और हिडन शुगर मिलाई जाती है। इन्हें इतना ज्यादा प्रोसेस किया जाता है कि इनका फाइबर खत्म हो जाता है। नतीजा यह होता है कि वजन घटने के बजाय पेट की चर्बी बढ़ने लगती है।

प्रोटीन बार

वर्कआउट के बाद या हल्की भूख लगने पर प्रोटीन बार खाना आजकल एक फैशन और स्टेटस सिंबल बन चुका है। लोग इसे चॉकलेट का हेल्दी विकल्प समझते हैं। अमेरिका के क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आप किसी भी प्रोटीन बार के पीछे लिखे न्यूट्रिशन लेबल को ध्यान से पढ़ें, तो पता चलेगा कि उसमें एक रेगुलर चॉकलेट बार जितनी ही कैलोरी और शुगर मौजूद होती है। कई प्रोटीन बार्स में हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप होता है, जो सीधे तौर पर वजन बढ़ाने का काम करता है।

पैकेज्ड फ्रूट जूस

पैकेट पर बनी ताजे फलों की तस्वीरें और उन पर लिखा '100% Pure' या 'No Added Sugar' देखकर हम अक्सर धोखा खा जाते हैं। हमें लगता है कि कोल्ड-ड्रिंक के मुकाबले जूस तो बेहतर ही है। लेकिन सच्चाई यह है कि पैकेज्ड जूस बनाते समय फलों का सारा फाइबर छानकर अलग कर दिया जाता है और पीछे बचता है सिर्फ लिक्विड शुगर। जब आप इसे पीते हैं, तो यह शरीर में ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा देता है, जिससे इंसुलिन स्पाइक होता है और शरीर फैट स्टोर करने लगता है।

डाइट चिप्स और रोस्टेड नमकीन

'फ्राइड नहीं, बेक्ड है' — इस एक टैगलाइन ने करोड़ों का बाजार खड़ा कर दिया है। वजन घटाने वाले लोग शाम की चाय के साथ डाइट चिवड़ा, बेक्ड पोटैटो चिप्स या मल्टीग्रेन पफ्स बेझिझक खाते हैं। हकीकत यह है कि किसी भी चीज को बेक करने के बाद उसका स्वाद बनाए रखने के लिए कंपनियां उसमें सोडियम, पाम ऑयल और प्रिजर्वेटिव्स की मात्रा बढ़ा देती हैं। डाइट समझकर लोग इन्हें जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं, जिससे कैलोरी इनटेक बढ़ जाता है।

फैट फ्री या लो फैट दही

वजन घटाने के दौरान डेयरी प्रोडक्ट्स से फैट हटाने के लिए लोग लो-फैट या बाजार में मिलने वाले फ्लेवर्ड योगर्ट की ओर भागते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब किसी फूड आइटम से फैट निकाला जाता है तो उसका स्वाद पूरी तरह खत्म हो जाता है। उस स्वाद को वापस लाने के लिए कंपनियां उसमें भारी मात्रा में चीनी और आर्टिफिशियल मिठास मिलाती हैं। फुल-फैट नेचुरल दही खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जबकि फ्लेवर्ड लो-फैट दही खाने के थोड़ी ही देर बाद दोबारा भूख लगने लगती है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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