उत्तर प्रदेश
8 घंटे पहले
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर जिले के फाजिलनगर कस्बे का नाम बदलकर पावागढ़ करने की बड़ी घोषणा की है। मंगलवार को तमकुहीराज क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। उनका कहना था कि इस इलाके के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इसे इसकी मूल पहचान से जोड़ना जरूरी है।
इतिहासकारों और जैन विद्वानों के मुताबिक, यही वह प्राचीन ‘पावापुरी’ है, जहां जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर को परिनिर्वाण यानी मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
मुख्यमंत्री ने सभा में क्या कहा
जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, “हमने इसके नामकरण का प्रस्ताव कर दिया है। अब इसका नाम फाजिलनगर नहीं होगा। अब हम इसे पावागढ़ के रूप में नई पहचान देंगे। भगवान महावीर के नाम से इस जगह का नाम होगा, क्यों हम फाजिल कहेंगे। भगवान महावीर के नाम पावागढ़ और यहां की संस्कृति से जुड़कर देश और दुनिया के लोग यहां आएंगे।”
नाम बदलने का फैसला क्यों लिया गया
मुख्यमंत्री ने कहा कि कस्बे के प्राचीन और गौरवशाली नाम के इतिहास को नजरअंदाज कर मध्यकालीन फाजिलनगर नाम बनाए रखना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए ही इसका नाम पावागढ़ करने का निर्णय लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि यह दूसरी बार है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फाजिलनगर कस्बे का नाम बदलने की बात कही है। इस घोषणा के बाद कुशीनगर प्रशासन भी सक्रिय हो गया है।
गौतम बुद्ध और भगवान महावीर से कैसा नाता
फाजिलनगर कस्बे को गौतम बुद्ध और भगवान महावीर दोनों से जुड़ा हुआ माना जाता है। पुरातत्व विभाग को यहां की खुदाई में कई ऐसी वस्तुएं मिली हैं, जिन्हें बुद्धकालीन बताया जाता है।
कहा जाता है कि भगवान बुद्ध जब बिहार से कुशीनारा, जो आज का कुशीनगर है, की ओर बढ़ रहे थे, तब वे अपने एक शिष्य के घर ठहरे थे। यह स्थान उस समय चेतिग्राम था और आज इसे सठियांव के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि शिष्य ने उन्हें भोजन में सूअर का मांस परोसा था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि यह भगवान बुद्ध का अंतिम भोजन था। इसके बाद यहां से 20 किमी दूर कुशीनगर में उन्हें महानिर्वाण प्राप्त हुआ था।
जहां तक जैन धर्म का संबंध है, माना जाता है कि भगवान महावीर ने पावा, यानी आज के फाजिलनगर में अपना अंतिम उपदेश दिया था और इसी स्थान पर उन्हें परिनिर्वाण की प्राप्ति हुई थी। यहां एक पावानगर महावीर इंटर कॉलेज भी मौजूद है।
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