नेपाल से ब्याह कर भारत आईं बहुएं... क्या SIR के बाद छिन जाएगा मतदान का अधिकार? उत्तराखंड में गहराई चिंता उत्तराखंड 3 महीने पहले 51
उत्तराखंड में SIR की प्रक्रिया शुरू होते ही नेपाल से शादी कर भारत आईं महिलाओं के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग के नियमों के चलते 2003 के बाद ब्याह कर आईं महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट से हटना लगभग तय माना जा रहा है।

उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू होते ही सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों की चिंता बढ़ गई है। सबसे बड़ा असर उन महिलाओं पर पड़ता दिख रहा है, जो नेपाल से शादी कर भारत में बस गई हैं। नागरिकता का मुद्दा तो पहले से ही उलझा हुआ था, लेकिन अब इन महिलाओं को मतदाता सूची से बाहर होने का डर भी सताने लगा है।

खुली सीमा और रोटी-बेटी के रिश्ते

उत्तराखंड और नेपाल के बीच करीब 275 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है। तिंकर से लेकर बनबसा तक फैले इस इलाके में दोनों देशों के लोगों के बीच रोटी-बेटी के गहरे रिश्ते हैं। आज भी सीमा के आर-पार शादियां यहां आम बात मानी जाती हैं।

हर साल हजारों की संख्या में नेपाली लड़कियां शादी कर भारत आती हैं और यहीं अपना घर बसा लेती हैं। बावजूद इसके, इन महिलाओं को नागरिक के तौर पर मिलने वाले अधिकार अब तक नहीं मिल पाए हैं। भारत को अपना घर मानने वाली इन महिलाओं के सामने अधिकारों का सवाल लगातार बना हुआ है।

SIR के नियम पूरे करना मुश्किल

सामाजिक कार्यकर्ता दीपक जोशी के अनुसार, उत्तराखंड में SIR की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक मतदाता या उसके माता-पिता का नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज होना अनिवार्य है। ऐसे में जो भी महिला 2003 के बाद शादी कर भारत आई हैं, उनका नाम वोटर लिस्ट से हटना लगभग तय है।

उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिक को ही मिलता है। ऐसी स्थिति में शादी कर भारत आईं इन महिलाओं के लिए SIR की शर्तें पूरी कर पाना लगभग असंभव हो जाता है।

बदल सकता है चुनावी समीकरण

पिथौरागढ़ के एडीएम योगेन्द्र सिंह का कहना है कि कुमाऊं की 7 विधानसभा सीटों पर नेपाली मूल की महिलाओं की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में अगर SIR के बाद इन महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटते हैं, तो इसका सीधा असर राजनीतिक दलों के चुनावी समीकरण पर पड़ेगा।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता सूची में होने वाले इस बदलाव से किस राजनीतिक दल को फायदा मिलता है और किसे नुकसान उठाना पड़ता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप