एक्सप्लेनर: दिल्ली में इस साल आग ने ली कितनी जानें? मालवीय नगर हादसे ने फिर खड़े किए सुरक्षा पर सवाल
भारत
4 घंटे पहले
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गर्मी का मौसम आते ही आग की घटनाएं अपना भयावह रूप दिखाने लगती हैं। ग्रामीण हो या शहरी इलाके, हर जगह ऐसे हादसों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल आग की घटनाओं ने कई परिवारों को गहरा सदमा दिया है। दिल्ली में जनवरी से 3 जून तक आग लगने की घटनाओं में कम से कम 66 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से अकेले 3 जून को मालवीय नगर के एक रेस्टोरेंट में हुए अग्निकांड में ही 21 लोगों की जान गई है।
मई में आग से गईं 13 जानें
दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से अप्रैल के बीच आग की घटनाओं में 32 लोगों की मृत्यु हुई, जबकि मई के पहले 27 दिनों में 13 मौतें दर्ज की गईं। बुधवार 3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक रेस्टोरेंट में इतनी भीषण आग लगी कि उसमें 21 लोगों की मौत हो गई।
मार्च में 15 लोगों की मौत
आंकड़ों के अनुसार जून का महीना इस साल अब तक सबसे घातक साबित हुआ है, हालांकि यह महीना अभी शुरू ही हुआ है। मार्च में आग से जुड़ी घटनाओं में 15 लोगों की मौत हुई थी। DFS के रिकॉर्ड के मुताबिक जनवरी में 6, फरवरी में 6, मार्च में 15 और अप्रैल में 5 लोगों की जान आग की घटनाओं में गई।
मई में सबसे ज्यादा आग की घटनाएं
गर्मी के महीनों में शहर में आग लगने की घटनाओं में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई। दिल्ली में जनवरी में 1,396, फरवरी में 1,096, मार्च में 1,538 और अप्रैल में 2,663 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि जून की सबसे बड़ी घटना मालवीय नगर की रही। मई के पहले 26 दिनों में ही अग्निशमन विभाग को फोन पर आग की 2,877 घटनाओं की सूचना मिली, जो अप्रैल की तुलना में कहीं अधिक है।
बड़ी संख्या में लोग झुलसे
आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी में आग की घटनाओं में 41 लोग झुलसे या उन्हें बचाया गया। फरवरी में यह संख्या 46, मार्च में 68 और अप्रैल में 119 रही। मई में 26 तारीख तक आग की घटनाओं में 99 लोगों के घायल होने या बचाए जाने की सूचना मिली। जून में हुए हादसे में 21 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य अभी गंभीर रूप से घायल हैं।
कचरे और कूड़े में लगी आग के मामले
इस साल दिल्ली में कचरे और कूड़े में आग लगने की घटनाएं भी काफी संख्या में सामने आईं। जनवरी में ऐसी 441, फरवरी में 331, मार्च में 539 और अप्रैल में 725 घटनाएं दर्ज की गईं। 26 मई तक विभाग ने कचरे में आग लगने की 766 शिकायतों पर कार्रवाई की।
आग लगने की प्रमुख वजहें
अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के महीनों में बढ़ते तापमान और शुष्क मौसम के कारण आम तौर पर आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं। DFS के आंकड़े बताते हैं कि मई में आपातकालीन कॉल और बचाव अभियानों की कुल संख्या बढ़ी, लेकिन आग से जुड़ी मौतों के मामले मार्च में दर्ज हुए सर्वाधिक आंकड़े से कम रहे।
रोकी जा सकती थीं ये घटनाएं
मालवीय नगर का अग्निकांड शहरी आपदाओं की भयावह कड़ी में एक और दुखद घटना है, जिसे रोका जा सकता था। दिल्ली अग्निशमन सेवा द्वारा जारी ताजा आंकड़े स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं। आज की त्रासदी से पहले भी जनवरी से 27 मई, 2026 के बीच आग की घटनाओं में 45 लोगों की जान जा चुकी थी, जबकि अकेले मई में आग की 2,877 कॉल दर्ज की गईं।
लापरवाही और सरकारी विफलताएं बनीं वजह
हालांकि कई बार आग की घटनाएं शॉर्ट सर्किट जैसी आकस्मिक तकनीकी दुर्घटनाओं के कारण होती हैं, लेकिन मालवीय नगर जैसी घटनाओं का भयावह पैमाना गहरी सरकारी खामियों की ओर इशारा करता है। सरकारी नक्शों का उल्लंघन, इमारतों में अवैध बेसमेंट और सुरक्षा मंजूरी में बरती जाने वाली लापरवाही ऐसी आपदाओं को न्योता देती है।
अगर किसी इमारत में बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता हो या खिड़कियां बंद हों और फिर भी उसकी सुरक्षा मंजूरी का नवीनीकरण कर दिया जाए, तो यह लोगों की जान के साथ सीधा समझौता है। ऐसी स्थिति में आग या किसी अन्य आपात स्थिति के दौरान लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है, क्योंकि उनके पास सुरक्षित ढंग से बाहर निकलने का पर्याप्त रास्ता नहीं होता।
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