खून से लाल हुआ समंदर, फरो आइलैंड्स में एक ही दिन 706 व्हेल और डॉल्फिन का संहार, दुनिया स्तब्ध विश्व एक घंटा पहले 2
उत्तरी अटलांटिक में स्थित फरो आइलैंड्स में सदियों पुरानी ग्रिंडाड्राप परंपरा के तहत एक दिन में 706 समुद्री जीवों को मार डाला गया, जिससे समुद्र खून से लाल हो गया और दुनियाभर में आक्रोश फैल गया।

उत्तरी अटलांटिक महासागर में बसा फरो आइलैंड्स एक बार फिर दुनियाभर की आलोचना के घेरे में है। यहां सदियों से चली आ रही ‘ग्रिंडाड्राप’ (Grindadrap) परंपरा के नाम पर एक ही दिन में 700 से ज्यादा व्हेल और डॉल्फिन का शिकार कर डाला गया। शिकार के बाद समुद्र का पानी खून से लाल हो उठा और इस मंजर की तस्वीरों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। 700 से अधिक समुद्री जीवों की हत्या की यह घटना सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है।

कब और कैसे हुआ यह शिकार

पर्यावरण संगठन सी शेफर्ड (Sea Shepherd) के मुताबिक, 27 मई को तीन अलग-अलग शिकार अभियानों में कुल 706 समुद्री स्तनधारियों को मौत के घाट उतार दिया गया। यह घटना स्कॉटलैंड से ठीक 200 मील उत्तर में हुई। मारे गए जीवों में 402 पायलट व्हेल, 300 से अधिक अटलांटिक व्हाइट-साइडेड डॉल्फिन और कुछ बॉटलनोज डॉल्फिन शामिल थीं।

संगठन के आंकड़ों के अनुसार टोर्शावन में 402 पायलट व्हेल और चार बॉटल-नोज़ डॉल्फ़िन, स्कालाबोटनुर में 168 व्हाइट-साइडेड डॉल्फ़िन और ह्वाल्विक में 132 व्हाइट-साइडेड डॉल्फ़िन को मारा गया। इस तरह तीनों जगहों को मिलाकर कुल 706 जीवों की जान ली गई।

उथले पानी में हुआ वध

स्थानीय शिकारी नावों की मदद से इन समुद्री जीवों को हांककर उथले पानी की ओर ले आए। यहीं पर हुक, चाकू और दूसरे हथियारों से उनका वध किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उस वक्त बड़ी तादाद में लोग तट पर मौजूद थे और कई बच्चे भी इस खूनी दृश्य को देख रहे थे। बाद में जानवरों के शवों को एक जगह जमा किया गया और स्थानीय समुदाय में बांटने के लिए उन्हें काटा गया।

तड़पते रहे कई जीव

सबसे चिंता की बात यह रही कि कई जानवरों की तुरंत मौत नहीं हुई। रिपोर्टों के अनुसार जरूरी उपकरणों की कमी के चलते कई डॉल्फिनों को लंबे समय तक तड़पना पड़ा और वे धीरे-धीरे खून बहने से मरीं।

संगठनों ने बताया 'अभूतपूर्व क्रूरता'

सी शेफर्ड और दूसरे पशु अधिकार संगठनों ने इस घटना को “अभूतपूर्व क्रूरता” करार दिया है। उनका कहना है कि यह महज परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक दौर की एक गैरजरूरी और अमानवीय प्रथा है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ शिकार अभियानों को जानबूझकर सार्वजनिक जानकारी से छिपाया गया और जो संरक्षण कार्यकर्ता इन्हें रिकॉर्ड करने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

सरकार कर रही परंपरा का बचाव

दूसरी ओर, फरो आइलैंड्स की सरकार इस परंपरा का बचाव कर रही है। सरकार का तर्क है कि यह करीब 1000 वर्ष पुरानी वाइकिंग संस्कृति का हिस्सा है और स्थानीय लोगों के लिए भोजन का एक अहम स्रोत भी है। हालांकि आलोचक इस दलील को खारिज करते हुए कहते हैं कि आधुनिक युग में इस तरह के सामूहिक शिकार का कोई औचित्य नहीं बचा है।

शिकार से एक दिन पहले बदला कानून

दिलचस्प पहलू यह है कि इस बड़े शिकार से ठीक एक दिन पहले फरो आइलैंड्स की संसद ने पशु कल्याण कानून में संशोधन कर शिकार की जाने वाली डॉल्फिनों को कानूनी संरक्षण के दायरे से बाहर कर दिया था। इसी फैसले ने पूरे घटनाक्रम को और भी ज्यादा विवादास्पद बना दिया है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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