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एक घंटा पहले
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की घरेलू शेयर बाजार से बिकवाली का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। जून के पहले सप्ताह में ही इन निवेशकों ने 42,927 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर अपनी पूंजी बाहर खींच ली। खास बात यह है कि पिछले महीने यानी मई में जहां पूरे महीने में 32,963 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी, वहीं इस बार महज पांच दिनों के कारोबार में ही उससे कहीं अधिक बिकवाली देखने को मिली। यह रुझान ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक पूंजी का झुकाव टेक्नोलॉजी और एआई से जुड़े अवसरों की ओर बढ़ रहा है और रुपये में कमजोरी बनी हुई है।
इस साल कुल निकासी 2.67 लाख करोड़ रुपये के पार
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, बीते हफ्ते की बिकवाली को जोड़ने पर साल 2026 में FPIs की भारतीय शेयरों से कुल निकासी बढ़कर 2.67 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। यह आंकड़ा पूरे 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से कहीं अधिक है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे, रुपये में गिरावट और वैश्विक बाजार में खासकर टेक्नोलॉजी एवं एआई क्षेत्र में निवेश के बेहतरीन अवसरों के चलते विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनाए हुए हैं।
स्पेसएक्स के आईपीओ ने खींचा वैश्विक निवेशकों का ध्यान
एल्फा एएमसी के संस्थापक राजेश सिंगला के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के साथ-साथ वैश्विक निवेशक इस समय दुनिया भर में उभर रहे टेक्नोलॉजी और एआई से जुड़े सबसे बड़े पब्लिक मार्केट अवसरों की ओर अपने फंड स्थानांतरित कर रहे हैं।
इलॉन मस्क की कंपनी SpaceX के आगामी IPO और प्रमुख एआई कंपनियों के इर्द-गिर्द संभावित कैपिटल मार्केट गतिविधियों के कारण वैश्विक नकदी वहां आकर्षित हो रही है। इन्हीं वजहों से भारत समेत अन्य उभरते बाजारों से अस्थायी तौर पर पूंजी बाहर जा रही है।
2026 में केवल फरवरी रही निवेश के लिहाज से सकारात्मक
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2026 में फरवरी को छोड़कर हर महीने FPIs शुद्ध बिकवाल रहे हैं। जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश रहा। हालांकि मार्च में बिकवाली और तेज हो गई और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए। इसके बाद अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मई में 32,963 करोड़ रुपये की निकासी हुई। जून के पहले सप्ताह में भी 42,927 करोड़ रुपये बाजार से बाहर निकाले गए।
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