झारखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
कहा जाता है कि जब आस्था मन में बस जाती है तो रास्तों की लंबाई कोई मायने नहीं रखती। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के रहने वाले युवा शिवभक्त रोहित कश्यप ने ऐसा ही एक संकल्प लिया है, जिसे सुनकर हर कोई अचंभित रह जाता है। भगवान भोलेनाथ के प्रति गहरी श्रद्धा और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संदेश लेकर वे करीब 7000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा पर निकले हैं।
इसी यात्रा के दौरान काशी से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल चलते हुए वे देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे। करीब एक महीने तक लगातार पैदल चलने के बाद जब रोहित बाबाधाम पहुंचे तो उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। यह चमक किसी उपलब्धि की नहीं, बल्कि उस आस्था की थी जिसने उन्हें हजारों किलोमीटर लंबे रास्ते पर चलने का हौसला दिया। कंधों पर जल, पैरों में छाले और मन में भोलेनाथ का नाम लेकर उन्होंने बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और विश्व शांति, मानव कल्याण तथा सनातन संस्कृति की उन्नति की कामना की।
क्या कहते हैं भक्त रोहित कश्यप
रोहित बताते हैं कि यह यात्रा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। इसके पीछे वर्षों की आस्था, विश्वास और एक बड़ा उद्देश्य जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि आज सनातन संस्कृति को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है और इसी मकसद से उन्होंने यह पैदल यात्रा शुरू की है। रास्ते में जब भी उनकी किसी से मुलाकात होती है, वे उन्हें सनातन संस्कृति, भारतीय परंपराओं और धार्मिक स्थलों के महत्व के बारे में बताते हैं।
रोहित ने बताया कि वे 29 अप्रैल को अपने घर से निकले थे और उनकी यह यात्रा करीब छह महीने तक चलेगी। उन्होंने कहा कि इस पूरे सफर में उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है—कभी तेज धूप, कभी बारिश तो कभी सुनसान रास्ते। लेकिन हर मुश्किल के बीच उन्हें ऐसा महसूस होता है मानो स्वयं भोलेनाथ उनका मार्गदर्शन कर रहे हों, और यही वजह है कि वे बिना रुके लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं।
बाबाधाम से जगन्नाथपुरी की राह
रोहित ने बताया कि देवघर उनके लिए बेहद खास पड़ाव रहा, क्योंकि बाबा बैद्यनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं और यहां दर्शन करना उनके जीवन का सपना था। बाबा के दरबार में पहुंचकर उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी सारी थकान पल भर में दूर हो गई हो। मंदिर में पूजा करने के बाद उन्होंने बाबा से अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी करने का आशीर्वाद भी मांगा।
हालांकि रोहित की यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है। बाबाधाम से आगे का सफर और भी लंबा तथा कठिन है। यहां से वे पैदल ही जगन्नाथपुरी के लिए रवाना होंगे। भगवान जगन्नाथ के दर्शन के बाद उनका अगला पड़ाव उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग होगा। इसके बाद वे हिमालय की कठिन वादियों में स्थित अमरनाथ धाम और फिर केदारनाथ धाम तक की यात्रा भी पैदल ही पूरी करेंगे। यह पूरा सफर लगभग 7000 किलोमीटर का होगा।
रास्ते में मिलता है लोगों का सहयोग
रास्ते में मिलने वाले लोगों का प्यार और सहयोग भी रोहित के लिए बड़ी ताकत बन रहा है। उन्होंने बताया कि कई जगहों पर लोग उनके रहने और खाने की व्यवस्था कर देते हैं। कुछ लोग उनकी यात्रा के बारे में सुनकर भावुक हो जाते हैं, तो कुछ उनके साथ थोड़ी दूर तक पैदल भी चलते हैं। यह प्रेम और सम्मान उन्हें आगे बढ़ने की नई ऊर्जा देता है।
रोहित की यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि विश्वास, समर्पण, धैर्य और संकल्प की ऐसी कहानी है जो हर किसी को प्रेरित करती है। आज के दौर में जब लोग छोटी-छोटी परेशानियों से घबरा जाते हैं, तब एक युवा हजारों किलोमीटर पैदल चलकर यह संदेश दे रहा है कि अगर लक्ष्य बड़ा हो और मन में विश्वास हो तो कोई भी राह कठिन नहीं होती।
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