अंबाला: लाखों की लागत से बने कम्युनिटी सेंटर खुद बने बदहाली की मिसाल, पूरा शुल्क लेकर भी सुविधाएं नदारद हरियाणा एक घंटा पहले 2
अंबाला नगर निगम की लापरवाही से सेक्टर-9 (वार्ड-18) का कम्युनिटी सेंटर टूटी खिड़कियों, उखड़े प्लास्टर और गंदगी के बीच जर्जर हालत में पहुंच गया है। पूरा शुल्क वसूले जाने के बावजूद सुविधाएं न मिलने से लोग महंगे निजी बैंक्वेट हॉलों की ओर रुख करने को मजबूर हैं।

शहरवासियों को कम खर्च में सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों के लिए बेहतर इंतजाम देने का दावा करने वाला अंबाला नगर निगम खुद कठघरे में खड़ा नजर आ रहा है। आम लोगों की सहूलियत के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए कम्युनिटी सेंटर आज देखरेख के अभाव में दम तोड़ते दिख रहे हैं। अंबाला शहर के सेक्टर-9 स्थित वार्ड नंबर-18 का कम्युनिटी सेंटर इसकी सबसे साफ बानगी बनकर सामने आया है, जहां टूटी खिड़कियां, उखड़ा हुआ प्लास्टर और चारों ओर फैली गंदगी निगम की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।

हैरानी की बात यह है कि जिन केंद्रों को आम जनता को सस्ती और बेहतर सुविधा देने के मकसद से तैयार किया गया था, अब लोग वहीं अपने कार्यक्रम कराने से कतराने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शादी, समारोह और दूसरे आयोजनों के लिए निगम पूरा निर्धारित शुल्क तो वसूल लेता है, लेकिन बदले में सुविधाओं के नाम पर सिर्फ निराशा ही मिलती है। यही वजह है कि कई परिवारों को निजी बैंक्वेट हॉल और अन्य जगहों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनका खर्च भी कई गुना बढ़ जाता है।

अंदर टूटे शीशे और मकड़ी के जाले, बाहर बिखरी निर्माण सामग्री

केंद्र के भीतर कदम रखते ही अव्यवस्था का मंजर साफ नजर आता है। इमारत की कई दीवारों का प्लास्टर झड़ चुका है और गंदगी के चलते परिसर की हालत बेहद खराब हो गई है। कई खिड़कियों के शीशे टूटे पड़े हैं, वहीं छतों और कोनों में मकड़ी के जालों ने कब्जा जमा रखा है।

बाहरी प्रांगण की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। यहां इंटरलॉकिंग टाइलें उखड़ी हुई हैं और निर्माण सामग्री, रेत तथा बजरी जहां-तहां बिखरी पड़ी है। इससे एक ओर जहां केंद्र की खूबसूरती पर असर पड़ा है, वहीं यहां पहुंचने वाले लोगों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

यह हालत इस ओर इशारा करती है कि नगर निगम के अधिकारियों की ओर से समय-समय पर निरीक्षण और रखरखाव न होने के कारण यह नौबत आई है। अगर नियमित देखभाल की जाती तो भवन की ऐसी दुर्दशा नहीं होती। शहर के दूसरे कम्युनिटी सेंटरों में भी ऐसी ही दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिससे साफ है कि यह केवल एक केंद्र की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की समस्या बन चुकी है।

पार्षद हितेश जैन ने मानी खामी

इस मामले पर जब वार्ड-18 के पार्षद हितेश जैन से बातचीत की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि कम्युनिटी सेंटर की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले केंद्र के आसपास सड़क निर्माण का काम चल रहा था और इसी दौरान स्थानीय लोगों ने उन्हें भवन की खस्ता हालत की जानकारी दी।

पार्षद ने कहा कि सरकार जनता को सुविधाएं देने के लिए ऐसे केंद्र बनवाती है, लेकिन रखरखाव में बरती जा रही लापरवाही से इनका मूल उद्देश्य ही पिछड़ रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही केंद्र के जीर्णोद्धार और मरम्मत का काम शुरू कराया जाएगा। इसके लिए वह पूर्व मंत्री असीम गोयल से भी चर्चा करेंगे, ताकि जरूरी संसाधन जुटाए जा सकें।

जनता को ठोस कार्रवाई का इंतजार

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नगर निगम लोगों से पूरा शुल्क वसूल रहा है, तो सुविधाओं का स्तर भी उसी के अनुरूप क्यों नहीं है। फिलहाल शहरवासी इस उम्मीद में हैं कि प्रशासन सिर्फ आश्वासनों तक सीमित न रहे, बल्कि जल्द से जल्द जमीनी स्तर पर कदम उठाकर कम्युनिटी सेंटरों को उनकी असली उपयोगिता और गरिमा लौटाए।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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