उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
SRI तकनीक से बदल रही खेती की तस्वीर
गोंडा जिले में किसान अब पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक कृषि तकनीकों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी क्रम में महिला किसान Girija Devi ने SRI यानी System of Rice Intensification विधि को अपनाकर धान की नर्सरी तैयार की है। यह तकनीक न केवल लागत को कम करती है बल्कि उत्पादन में भी इजाफा करती है। कृषि विभाग और पानी संस्थान के मार्गदर्शन में अपनाई गई यह विधि अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक उदाहरण बन गई है।
कम उम्र की पौध और पर्याप्त दूरी का महत्व
Girija Devi बताती हैं कि इस विधि में धान की कम उम्र वाली पौध का रोपण किया जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- बेहतर विकास: पौधों के बीच उचित दूरी रखने से उन्हें बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह और पोषण मिलता है।
- मजबूत जड़ें: इस तकनीक से रोपाई करने पर पौधों की जड़ें काफी मजबूत होती हैं।
- कम पानी की खपत: पारंपरिक खेती के मुकाबले इस विधि में सिंचाई के लिए कम पानी की जरूरत पड़ती है, जिससे खर्च में भारी बचत होती है।
कम बीज, अधिक कल्ले और बंपर पैदावार
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत कम बीज का इस्तेमाल है। Girija Devi के अनुसार, कम बीज डालने के बावजूद पौधों में अधिक संख्या में कल्ले निकलते हैं, जिससे फसल की पैदावार में काफी बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा, खेत में खरपतवार प्रबंधन और पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना भी काफी आसान हो जाता है। खेती की बढ़ती लागत के दौर में यह तकनीक किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रही है, जहां संसाधनों की बचत के साथ-साथ बेहतर मुनाफा भी संभव है।
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