छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
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छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की दस्तक के साथ ही किसान धान की बुआई की तैयारियों में जुट गए हैं। खेतों की जुताई, खाद का प्रबंधन और बीज चयन जैसे काम इन दिनों तेजी पकड़ चुके हैं। ऐसे मौके पर कृषि विशेषज्ञ किसानों को बीजोपचार पर खास ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं, ताकि फसल को शुरुआत से ही रोग और कीटों के हमले से सुरक्षित रखा जा सके।
विशेषज्ञ ने बताया कम लागत वाला देसी तरीका
बालोद जिले के कृषि विज्ञान केंद्र की पौध रोग वैज्ञानिक डॉ. भूमेश्वरी साहू ने किसानों को धान के बीज के लिए एक सरल और देसी उपाय सुझाया है, जिसे गांवों में बिना किसी महंगे उपकरण के अपनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि धान के बीज को 17 प्रतिशत नमक के घोल से उपचारित करना बेहद कारगर तरीका है।
इस विधि से बीजों में छिपे कीड़े, उनके अंडे, रोगग्रस्त दाने और खरपतवार के बीज बड़ी आसानी से अलग हो जाते हैं। यह उपाय खासतौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद है, जो परंपरागत खेती के साथ कम लागत में बेहतर उत्पादन की चाह रखते हैं।
आलू-अंडे से ऐसे पहचानें सही घोल
डॉ. साहू के अनुसार, अगर किसी किसान के पास नमक का घोल मापने वाला कोई वैज्ञानिक उपकरण नहीं है, तब भी गांव में आसानी से सही घोल तैयार किया जा सकता है। इसके लिए किसान एक टब में 10 लीटर पानी लें और उसमें एक किलो 700 ग्राम नमक अच्छी तरह घोल दें।
घोल सही बना है या नहीं, इसकी पहचान के लिए गांव का सबसे आसान तरीका अपनाया जाता है। एक आलू या अंडा घोल में डाला जाता है। अगर आलू या अंडा घोल में तैरने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि घोल सही अनुपात में तैयार हो चुका है।
स्वस्थ और खराब बीज की पहचान
सही घोल तैयार होने के बाद धान के बीज इसमें डालकर हाथ से अच्छी तरह मिलाने होते हैं। कुछ देर बाद जो बीज नीचे बैठ जाते हैं, उन्हें स्वस्थ और अच्छा माना जाता है, जबकि ऊपर तैरने वाले बीज अक्सर हल्के, रोगग्रस्त या खरपतवार मिले हुए होते हैं। ऐसे बीजों को छन्नी की मदद से निकालकर अलग कर देना चाहिए।
छांव में सुखाना न भूलें
डॉ. भूमेश्वरी साहू के मुताबिक, नीचे बैठे अच्छे बीजों को दो बार साफ पानी से धोकर छांव में सुखाना जरूरी है। इसके बाद किसान चाहें तो अतिरिक्त सुरक्षा के लिए मैंकोजेब और कार्बेंडाजिम के मिश्रण से भी बीजोपचार कर सकते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह देसी तरीका न सिर्फ किसानों की लागत बचाता है, बल्कि फसल की शुरुआती सेहत सुधारकर उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करता है।
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