उपनाम: पशुपालन
सांची दुग्ध समिति: गांव में अपना डेयरी कारोबार कैसे शुरू करें, जानें पूरी प्रक्रिया और कमाई का गणित
मध्य प्रदेश के गांवों में सांची दुग्ध समिति खोलकर किसान नियमित आय कमा सकते हैं। जानिए इसे शुरू करने के लिए जरूरी शर्तें, पंजीकरण प्रक्रिया और इससे मिलने वाले लाभ।
जुलाई-अगस्त में फिर महंगी हो सकती है आपकी दूध की थैली, अल नीनो का साया बढ़ाएगा परेशानी
मानसून की बेरुखी और अल नीनो के प्रभाव से दूध उत्पादन प्रभावित होने के आसार हैं, जिससे आने वाले महीनों में कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
विश्व ऊंट दिवस: 50 डिग्री तापमान में भी अमृत के समान है ऊंटनी का दूध, जानिए इसे 'व्हाइट गोल्ड' क्यों कहते हैं
थार के रेगिस्तान में ऊंटनी का दूध केवल पोषण का स्रोत नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती का जरिया भी बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह दूध कई गंभीर बीमारियों से लड़ने में कारगर है।
मानसून में पशुओं की सेहत का रखें खास ख्याल, खुर की इस समस्या से घट सकता है दूध का उत्पादन
बरसात के दिनों में नमी और कीचड़ के कारण पशुओं के खुरों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। भीलवाड़ा के विशेषज्ञों ने दूध उत्पादन सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय बताए हैं।
पशुपालक सावधान: खेतों की मेड़ पर उगने वाले ये पौधे हो सकते हैं आपके मवेशियों के लिए काल
खेतों और चरागाहों में उगने वाले कुछ सामान्य दिखने वाले पौधे मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञ पशुओं को इनसे बचाने के उपाय और जहर के असर को कम करने के तरीके बता रहे हैं।
Hadoti में चारे की भारी किल्लत, 50% बढ़े दाम से पशुपालकों की कमर टूटी
Hadoti क्षेत्र में चारे की कीमतों में 50 फीसदी का उछाल आने से पशुपालक परेशान हैं, जिसके चलते आने वाले दिनों में दूध के दाम बढ़ सकते हैं।
बकरी पालकों के लिए जरूरी सलाह! बरसात से पहले लगवाएं पीपीआर का टीका, टलेगा बड़ा खतरा
बरसात के मौसम में बकरियों में फैलने वाली पीपीआर बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। पशु चिकित्सक के अनुसार समय रहते टीका लगवाकर और बीमार बकरियों को अलग रखकर इस नुकसान से बचा जा सकता है।
बारिश से पहले पशुओं को जरूर कराएं डीवार्मिंग, विशेषज्ञ से समझें एल्बेंडाजोल की सही खुराक और दूध बढ़ाने का तरीका
झारखंड में मानसून दस्तक देने वाला है, ऐसे में पशु विशेषज्ञ का कहना है कि समय रहते डीवार्मिंग कराने से पशुओं को पेट के कीड़ों से बचाया जा सकता है और दूध उत्पादन भी बेहतर होता है।
गोबर से बनेगी जैविक खाद, किसानों की हर महीने होगी हजारों की अतिरिक्त कमाई
मध्य प्रदेश के प्रगतिशील किसान के अनुसार दुधारू पशुओं के गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाकर किसान खेती की लागत घटा सकते हैं और हर महीने 18 से 20 हजार रुपये तक अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं।
मुफ्त में मिलने वाली यह चीज है पशुओं की 'किशमिश', गायों को खिलाते ही दूध से भर जाएगी बाल्टी
ग्रामीण इलाकों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाला महुआ पशुओं के लिए पौष्टिक आहार माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार सीमित मात्रा में इसे खिलाने से दुधारू पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ता है और सेहत भी सुधरती है।
गोट गुरुकुल मॉडल: जब किसान बने शिक्षक, बकरी पालन से बढ़ी ग्रामीण आय
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ गोट मैनेजमेंट (IIGM) के गोट गुरुकुल परिसर को देश का पहला सामुदायिक प्रशिक्षण एवं अधिगम केंद्र घोषित किया गया है, जहां प्रशिक्षित किसान ही अपने समुदाय को बकरी पालन की तकनीक सिखा रहे हैं और अतिरिक्त मुनाफा कमा रहे हैं।
गर्मी में गिर रहा गाय-भैंस का दूध? पशु चिकित्सक का गुड़ और सेंधा नमक वाला देसी नुस्खा
जून-जुलाई की तेज गर्मी में दुधारू पशुओं का दूध घटना आम बात है, पर पशु चिकित्सक डॉ. पूनम शॉरेन के मुताबिक सही खानपान और देखभाल से इस गिरावट को बड़ी हद तक रोका जा सकता है।
खेतों में पनप रहा 'साइलेंट किलर', एक निवाला चारा और तड़पकर दम तोड़ रहे पशु — कहां हो रही चूक?
गर्मी और पानी की कमी से ज्वार-बाजरे के सूखते पौधों में 'साइनोसाइड' नामक जहरीला तत्व बन जाता है, जो चारे के रूप में खाने पर पशुओं की जान ले सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने पशुपालकों को नियमित सिंचाई और सूखा-सिकुड़ा चारा न खिलाने की सख्त सलाह दी है।
डेयरी व्यवसाय शुरू करने की योजना? घर पर पालें ये उन्नत नस्ल की भैंस, मिलेगा भरपूर दूध
मुर्रा, मेहसाना, जाफराबादी और भदावरी जैसी उन्नत भैंस नस्लें भीलवाड़ा समेत ग्रामीण इलाकों में डेयरी कारोबार को नई रफ्तार दे रही हैं और किसानों की आय बढ़ा रही हैं। सही नस्ल चुनकर और उचित देखभाल कर पशुपालक अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
बरसात में पशुओं पर मंडराया बीमारियों का खतरा: गलाघोटू से 24 घंटे में मौत, लंगड़ा बुखार और खुरपका-मुंहपका भी घातक; जानिए लक्षण और बचाव
बरसात के मौसम में नमी, कीचड़ और दूषित पानी के कारण पशुओं में संक्रमण तेजी से फैलता है। गलाघोटू जैसी बीमारी तो 24 घंटे के भीतर पशु की जान ले सकती है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।